क्या बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप भी पहुंचे?

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क्या बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप भी पहुंचे?

सारांश

बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन हो रहा है, जिसमें उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा और तेज प्रताप यादव भी शामिल हुए। यह भोज राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। जानें इस भोज के पीछे की राजनीति और तेज प्रताप की रणनीतियों के बारे में।

Key Takeaways

  • मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन हो रहा है।
  • उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा और तेज प्रताप यादव शामिल हुए।
  • राजनीतिक चर्चाएं और समीकरणों में बदलाव की संभावनाएं।

पटना, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर कई राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया जा रहा है। इस भोज ने प्रदेश में राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के दही-चूड़ा भोज में मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एनडीए के कई नेता भी उपस्थित रहे, और जन शक्ति जनता दल के प्रमुख तथा पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव भी शामिल हुए।

तेजप्रताप यादव के इस भोज में शामिल होने के बाद विभिन्न कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि, तेज प्रताप ने मीडिया से बातचीत में ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने यह ज़रूर कहा कि वे अपने धर्म को निभाने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विचार भले ही भिन्न हों, लेकिन नेता आपस में मिलते रहते हैं।

एनडीए में शामिल होने के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कुछ होगा तो सभी को सूचित किया जाएगा। वहीं, विजय सिन्हा ने तेज प्रताप के एनडीए में आने के बारे में कहा कि जब कुछ होगा, तो सबको पता चल जाएगा।

अब सभी की नजरें बुधवार को तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज पर टिकी हैं। इस भोज में उन्होंने बिहार के कई मंत्रियों और एनडीए के नेताओं को आमंत्रित किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-कौन से दल के नेता इस भोज में उपस्थित होते हैं। पहले, लालू यादव हर वर्ष ऐसा आयोजन करते रहे हैं।

बता दें कि तेज प्रताप यादव राजद और लालू परिवार से निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन वे अपने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाने में गंभीरता दिखा रहे हैं। बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तेज प्रताप इस भोज के माध्यम से नए राजनीतिक समीकरण बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

इसी बीच, बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था, जिसमें कोई विधायक नहीं पहुंचे थे।

Point of View

बल्कि नेताओं के बीच की राजनीतिक समीकरणों को भी उजागर करता है। तेज प्रताप यादव का इस भोज में शामिल होना यह दर्शाता है कि वे अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने के लिए सक्रिय हैं।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

चूड़ा-दही भोज का महत्व क्या है?
चूड़ा-दही भोज मकर संक्रांति पर होने वाला एक पारंपरिक उत्सव है, जो सामाजिक मेलजोल और एकता का प्रतीक है।
तेज प्रताप यादव का इस भोज में शामिल होना क्यों महत्वपूर्ण है?
तेज प्रताप का इस भोज में शामिल होना राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत हो सकता है।
क्या तेज प्रताप यादव एनडीए में शामिल होंगे?
तेज प्रताप ने इस विषय पर कोई स्पष्टता नहीं दी, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि यदि ऐसा कुछ होगा तो सबको सूचित किया जाएगा।
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