क्या आइस हॉकी बर्फ पर खेलने वाला तेज और रोमांचक खेल है?

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क्या आइस हॉकी बर्फ पर खेलने वाला तेज और रोमांचक खेल है?

सारांश

क्या आप जानते हैं आइस हॉकी का खेल कैसे बर्फ पर खेला जाता है? यह एक तेज़, रोमांचक और प्रतिस्पर्धात्मक खेल है जिसमें खिलाड़ियों की ताकत, गति और रणनीति की आवश्यकता होती है। जानिए इसकी रोचक शुरुआत और भारत में इसके विकास के बारे में।

Key Takeaways

  • आइस हॉकी एक तेज और रोमांचक खेल है।
  • इस खेल की शुरुआत 19वीं सदी में कनाडा में हुई।
  • पक का व्यास 3 इंच और वजन 5.5 से 6 औंस होता है।
  • भारत में इस खेल का विकास हो रहा है, खासकर हिमालय क्षेत्र में।
  • आइस हॉकी ओलंपिक का हिस्सा है, जिसमें पुरुष और महिला दोनों टीमें शामिल हैं।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आइस हॉकी एक तेज और रोमांचक खेल है, जो बर्फ पर खेला जाता है, जिसमें दो टीमें स्टिक के माध्यम से पक को गोल में डालने का प्रयास करती हैं। इस खेल में ताकत, गति और रणनीति की आवश्यकता होती है और खिलाड़ी स्केट्स पहनते हैं।

आइस हॉकी की शुरुआत 19वीं सदी के प्रारंभ में कनाडा में हुई थी। शुरू में इसे गेंद के साथ खेला जाता था, लेकिन धीरे-धीरे डिस्क (पक) ने इसकी जगह ले ली।

वल्कनीकृत रबर से बनी पक काली, ठोस, चपकी और गोल डिस्क होती है, जिसे मुकाबले से पहले फ्रीज किया जाता है ताकि यह उछले नहीं। पक का व्यास 3 इंच, मोटाई 1 इंच और वजन 5.5 से 6 औंस के बीच होता है। इसे स्टिक की मदद से नियंत्रित किया जाता है।

आइस हॉकी का पहला संगठित मैच 1875 में मॉन्ट्रियल में आयोजित हुआ। 1879 में, मैकगिल यूनिवर्सिटी के दो छात्रों, रॉबर्टसन और स्मिथ ने इसके शुरुआती नियमों को बनाया।

1880 में पहली मान्यता प्राप्त टीम मैकगिल यूनिवर्सिटी हॉकी क्लब की नींव रखी गई। इसी समय आइस हॉकी कनाडा का राष्ट्रीय खेल बन गया। 1892 में कनाडा के गवर्नर जनरल ने स्टेनली कप की स्थापना की।

1890 के दशक तक, यह खेल संयुक्त राज्य अमेरिका में फैल गया। 1908 में अंतरराष्ट्रीय आइस हॉकी महासंघ (आईआईएचएफ) की स्थापना हुई और 1910 में पहली यूरोपियन चैंपियनशिप का आयोजन किया गया।

आखिरकार, 1920 के विंटर ओलंपिक में इस खेल को शामिल किया गया। 1924 में शैमॉनिक्स में हुए पहले शीतकालीन ओलंपिक में सिक्स-ए-साइड मेंस आइस हॉकी का समावेश किया गया। वहीं, महिला आइस हॉकी ने 1988 के नागानो शीतकालीन ओलंपिक में आधिकारिक रूप से डेब्यू किया।

आइस हॉकी आमतौर पर 60 मिनट का खेल होता है, जिसे 20-20 मिनट के तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इस दौरान सर्वाधिक गोल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है। अगर स्कोर बराबरी पर होता है, तो खेल ओवरटाइम में जाता है। ओवरटाइम में जो टीम पहले गोल करती है, वह विजेता होती है। यदि ओवरटाइम गोलरहित रहता है, तो मुकाबले का फैसला शूटआउट से होता है।

पुरुषों के खेल में अधिकतम 25 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें 22 स्केटर और 3 गोलटेंडर होते हैं, जबकि महिलाओं के मुकाबलों में अधिकतम 23 खिलाड़ी होते हैं। एक समय में एक टीम से अधिकतम 6 सदस्य खेल सकते हैं, जिनमें आमतौर पर 5 स्केटर और 1 गोलटेंडर होता है।

भारत में आइस हॉकी ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान शुरू हुई। 1930 में शिमला में इसे खेला गया। आजादी के बाद, 1960 के दशक में लद्दाख में भारतीय सेना ने इसे स्थानीय आबादी के बीच बढ़ावा दिया।

हालांकि ओलंपिक या विश्व मंच पर भारत को इस खेल में विशेष सफलता नहीं मिली, लेकिन हिमालय के क्षेत्रों में इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी है। बेहतर बुनियादी ढांचा और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर से भविष्य में सुधार की संभावना है।

Point of View

बल्कि यह भारतीय समाज में बर्फ आधारित खेलों के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रहा है। हमें अपने खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और प्रशिक्षण देने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए, ताकि भविष्य में भारत इस खेल में भी उत्कृष्टता हासिल कर सके।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

आइस हॉकी की शुरुआत कब हुई?
आइस हॉकी की शुरुआत 19वीं सदी की शुरुआत में कनाडा में हुई थी।
आइस हॉकी का पहला संगठित मैच कब हुआ?
आइस हॉकी का पहला संगठित मैच 1875 में मॉन्ट्रियल में आयोजित हुआ।
आइस हॉकी में एक टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं?
पुरुषों के खेल में अधिकतम 25 और महिलाओं के खेल में अधिकतम 23 खिलाड़ी होते हैं।
भारत में आइस हॉकी की शुरुआत कब हुई?
भारत में आइस हॉकी की शुरुआत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान 1930 में शिमला में हुई।
आइस हॉकी का ओवरटाइम कैसे होता है?
अगर मुकाबले का स्कोर बराबरी पर होता है, तो खेल ओवरटाइम में जाता है, जिसमें जो टीम पहले गोल करती है, वह विजेता होती है।
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