क्या दिल्ली सरकार ने कार्बन क्रेडिट से आय अर्जित करने की योजना को मंजूरी दी?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली सरकार ने कार्बन क्रेडिट योजना को मंजूरी दी।
- यह योजना प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगी।
- इससे नई वित्तीय संसाधन जुटाने का अवसर मिलेगा।
- सरकार पर कोई सीधा खर्च नहीं आएगा।
- अन्य राज्यों के सफल प्रयोगों से प्रेरणा ली गई है।
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग के माध्यम से कार्बन क्रेडिट से आय अर्जित करने की योजना को लागू करने को मंजूरी दे दी है। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली में चल रही हरित योजनाओं को सुचारू रूप से जोड़कर प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए नए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करना है। यह पहल दिल्ली को जलवायु कार्रवाई में देश के शीर्ष राज्यों में स्थापित करती है।
यह निर्णय दिल्ली सरकार की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता और भारत के नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दिल्ली में जो भी परियोजना एक मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड या उसके बराबर उत्सर्जन कम करती है, उसके बदले एक कार्बन क्रेडिट तैयार किया जाएगा। इन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वैच्छिक या नियामक बाजारों में बेचा जा सकेगा। खास बात यह है कि यह पूरा मॉडल सरकार पर किसी भी प्रकार का सीधा खर्च डाले बिना कार्य करेगा।
परिवहन, बिजली, वन, जल, शहरी विकास जैसे विभिन्न विभागों में चल रही योजनाएं, जैसे इलेक्ट्रिक बसें, सोलर रूफटॉप, वृक्षारोपण, पानी के पुनः उपयोग और कचरा प्रबंधन, अब केवल पर्यावरण सुधार तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इनके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिए धन भी जुटाया जा सकेगा।
इस पहल के प्रति पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "दिल्ली पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन, यमुना सफाई, लैंडफिल से बायोगैस और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। इस रूपरेखा के माध्यम से हम इन प्रयासों को मापेंगे, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणित करेंगे और पारदर्शी तरीके से उनसे आय अर्जित करेंगे। यह राशि फिर से प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु सुधार पर ही खर्च होगी।"
सिरसा ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दिल्ली के पर्यावरणीय प्रयास और ज्यादा मज़बूत होंगे।
पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग इस पूरी प्रक्रिया का नोडल विभाग होगा। इस रूपरेखा के मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाने वाली परियोजनाओं की पहचान और पंजीकरण की व्यवस्थित व्यवस्था बनाना, मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और सत्यापन की भरोसेमंद प्रणाली तैयार करना है। इसके अलावा, कार्बन क्रेडिट के निर्गमन और बिक्री की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना, विभागों की क्षमता बढ़ाकर उन्हें लंबे समय तक कार्बन बाजार से जोड़ना, और दिल्ली को जलवायु वित्त में एक उदाहरण के रूप में स्थापित करना है।
इस योजना में विशेषज्ञ एजेंसियों को सक्सेस-फी मॉडल पर जोड़ा जाएगा, यानी भुगतान तभी होगा जब वास्तव में कार्बन क्रेडिट से आय होगी। इससे सरकार पर कोई अग्रिम खर्च नहीं आएगा। अधिकतम तीन एजेंसियों को जोड़ा जाएगा ताकि काम का दायरा बड़ा हो सके।
इन एजेंसियों द्वारा परियोजना मूल्यांकन, डॉक्यूमेंटेशन, पंजीकरण, क्रेडिट जारी करना, बिक्री की रणनीति और विभागीय प्रशिक्षण जैसे सभी कार्य किए जाएंगे। प्राप्त धनराशि का उपयोग प्रदूषण रोकथाम, जलवायु अनुकूलन और पर्यावरण प्रबंधन के लिए तय व्यवस्था के तहत किया जाएगा।
सिरसा ने कहा कि यह पहल सभी विभागों के प्रयासों को सशक्त बनाएगी, चाहे वह शहरी वन हों, सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा हो, या वेस्ट-टू-एनर्जी बनाने की परियोजनाएं।
इस प्रस्ताव को वित्त, योजना, कानून, बिजली, वन, शहरी विकास और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों का समर्थन मिला है। वित्त विभाग ने इसे बिना वित्तीय बोझ वाला और नियमों के अनुरूप बताया है।
दिल्ली ने इंदौर, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के सफल प्रयोगों से सीख ली है। इंदौर ने जैविक कचरा और सोलर परियोजनाओं से करीब 50 लाख रुपए कमाए, मेघालय में किसानों को प्रति टन कार्बन के लिए 40 यूरो मिले, और अरुणाचल प्रदेश की जलविद्युत परियोजना से हजारों टन कार्बन क्रेडिट तैयार हुए। ये उदाहरण दिखाते हैं कि सही दिशा में काम किया जाए तो पर्यावरण संरक्षण से भी मजबूत आय हो सकती है।
अनुमान है कि दिल्ली की व्यापक हरित योजनाओं से आने वाले समय में सैकड़ों करोड़ रुपए तक के कार्बन क्रेडिट तैयार हो सकते हैं, जो सीधे तौर पर शहर के पर्यावरण सुधार में लगाए जाएंगे।
सिरसा ने कहा, "यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसमें मनुष्य और प्रकृति दोनों को प्राथमिकता दी जाती है। दिल्ली अब अपने पर्यावरणीय प्रयासों को ठोस लाभ में बदल रही है, स्वच्छ हवा, साफ नदियां, और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य।"