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क्या भाजपा ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मौन धरना देकर एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया?

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क्या भाजपा ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मौन धरना देकर एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया?

सारांश

भाजपा ने दरभंगा में पीएम मोदी की मां के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ पटना में मौन धरना दिया। नेताओं ने मां के सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया। क्या यह धरना समाज में जागरूकता लाएगा?

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री मोदी की मां का अपमान बिहार की संस्कृति के खिलाफ है।
धरने में नेताओं ने मां के सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया।
यह घटना राजनीतिक संवाद में बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

पटना, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के प्रति दरभंगा में राजद और कांग्रेस के मंच से की गई अपमानजनक टिप्पणियों के विरोध में, शनिवार को भाजपा के नेता और कार्यकर्ता पटना के गांधी मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मौन धरना आयोजित किया।

इस अवसर पर सभी नेताओं ने हाथ में काली पट्टी बांध रखी थी और उनके हाथ में विभिन्न स्लोगन लिखी तख्तियां थीं। धरने का नेतृत्व कर रहे पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिहार के लोग अपनी मां का अपमान सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह देश राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से माफी मांगने की उम्मीद करेगा।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां का अपमान करना क्या संस्कार है? उन्होंने इसे बेशर्मी करार दिया। एक तरफ, संविधान की रक्षा की बात करते हैं और दूसरी तरफ पीएम की मां का अपमान करते हैं। वे खुद एक पीएम के बेटे और पोते हैं। इस घटना ने पूरे देश को गुस्से में डाल दिया है।

राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री की स्वर्गीय माताजी को मंच से गाली देना, बिहार को शर्मसार करने वाला है। यहां मां की पूजा होती है। हम छठी मैया का सम्मान करते हैं।

उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से अनुरोध किया कि यदि आपको लगता है कि आपके मंच का दुरुपयोग हुआ है, तो क्षमा मांगकर इस मामले को समाप्त करें। बिहार की अस्मिता और सम्मान को बचाएं।

पूर्व सांसद रामकृपाल यादव ने कहा कि यह केवल पीएम मोदी की माताजी का अपमान नहीं है, बल्कि यह देश की हर मां के खिलाफ है। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम मौन धारण कर यह संदेश दे रहे हैं कि कांग्रेस का चरित्र कभी नहीं बदलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक टिप्पणी हर किसी की मां के प्रति सम्मान को प्रभावित करती है। यह घटना बिहार के संस्कृति को चुनौती देती है और हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपनी माताओं के सम्मान को बनाए रख सकते हैं।
RashtraPress
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राष्ट्र प्रेस
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