क्या भाजपा नेताओं ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज करने के फैसले का स्वागत किया?
सारांश
Key Takeaways
- उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज।
- सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के आधार पर फैसला लिया।
- भाजपा नेताओं ने न्यायपालिका के फैसले का स्वागत किया।
पटना, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद और भाजपा नेता संजय जायसवाल ने सोमवार को दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने का स्वागत किया है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं न्यायपालिका के फैसले का स्वागत करता हूं। उमर खालिद और शरजील इमाम ने चिकन नेक कॉरिडोर को तोड़ने और देश के खिलाफ नफरत फैलाने का काम किया है। वे वही काम कर रहे हैं जो पाकिस्तान कर रहा है। वे उसी तरह का काम कर रहे हैं जैसा कसाब ने किया था। जो लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।"
भाजपा सांसद रविशंकर ने कहा कि जहां तक मैंने देखा है, सुप्रीम कोर्ट ने सारे सबूतों का प्रशिक्षण किया था। इसके बाद ही कोर्ट को लगा कि जमानत नहीं देनी चाहिए। जो लोग इनके (उमर खालिद और शरजील इमाम) अधिकार की बात करते हैं, मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि दिल्ली दंगे में 50 से अधिक लोग मारे गए थे, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
भाजपा नेता संजय जायसवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे असामाजिक तत्वों को जेल में डालने के सरकार के फैसले का समर्थन किया है। किसी को भी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। जिस तरह इन लोगों ने दिल्ली को अस्थिर करने का प्रयास किया और ऐसे कृत्य किए, जो आतंकवादी गतिविधियों की श्रेणी में आते हैं, वह देश के लिए बेहद चिंताजनक हैं। जब पढ़े-लिखे लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो यह स्थिति पूरे देश के लिए डर पैदा करने वाली होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है, जबकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते।
यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को आरोपियों और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद के निरंतर कारावास को आवश्यक नहीं माना और उनकी जमानत मंजूर कर ली।