अभय कुशवाहा का दावा: भाजपा ने नीतीश कुमार को राजनीतिक खेल में किया किनारे
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का इस्तीफा भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
- अभय कुशवाहा ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- भाजपा ने 2020 में जदयू को कमजोर करने के लिए 'बी-टीम' को उतारा।
- नक्सलवाद हाशिए पर पड़े समुदायों की प्रतिक्रिया है।
- भाजपा ने 2025 में अपनी योजनाओं को अंजाम दिया।
नई दिल्ली, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विधान परिषद से इस्तीफा देने पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद अभय कुशवाहा ने कहा कि यह तो निश्चित रूप से होना ही था। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि बिहार की राजनीति का गहराई से अवलोकन करने के बाद मैं पूरी तरह से यकीन के साथ कह सकता हूँ कि 2020 से भाजपा नीतीश कुमार को दरकिनार करने के लिए एक बड़ी राजनीतिक योजना पर कार्य कर रही थी। 2020 में जदयू की सीटें कम हो गई थीं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी सीटें क्यों गिरीं?
नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए राजद सांसद अभय कुशवाहा ने कहा कि 2020 के चुनाव के दौरान, आपको याद होगा कि भाजपा ने जनता दल (यूनाइटेड) को रणनीतिक रूप से कमजोर करने और हराने के लिए अपनी 'बी-टीम' को मैदान में उतारा था। भाजपा की योजना नीतीश कुमार को साइडलाइन करने की पहले से ही चल रही थी। 2025 में भाजपा ने अपने कार्य को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दे दिया।
लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नक्सलवाद पर दिए बयान पर राजद सांसद ने कहा कि नक्सलवाद न तो देश के लिए और न ही किसी राज्य के लिए कोई समाधान है, हालांकि इस पर गंभीर सवाल उठते हैं कि नक्सलवाद आखिर क्यों और कैसे पनपा। मैंने सदन में कहा था कि नक्सलवाद असल में दमन के खिलाफ एक प्रतिक्रिया के तौर पर उभरा। हाशिए पर पड़े समुदायों के लोग, जिन्हें उस दौर में भेदभाव का सामना करना पड़ा था, उन्हीं के बीच से नक्सलवाद का उदय हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में अमित शाह कह रहे थे कि नक्सलवाद को खत्म कर दिया गया है, जबकि बिहार में 2014 के पहले ही नक्सलवाद समाप्त हो चुका था, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह केवल नाम के लिए ही था। सवाल यह है कि जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, उन्हें मुख्यधारा से कैसे जोड़ा जाए।