ब्लैक होल: ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों में एक अद्वितीय तत्व
सारांश
Key Takeaways
- ब्लैक होल प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
- इनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति अविश्वसनीय होती है।
- ब्लैक होल के चारों ओर एक्रीशन डिस्क होती है।
- यहां इवेंट होराइजन एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
- सुपरनोवा के बाद बड़े तारे ब्लैक होल में परिवर्तित होते हैं।
नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों में ब्लैक होल का स्थान सर्वोच्च है। अपने नाम के विपरीत, ये कोई 'छेद' नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी जगह हैं जहाँ अत्यधिक द्रव्यमान एकत्रित होता है, जिससे इसका गुरुत्वाकर्षण अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली होता है। यह इतना प्रबल होता है कि यहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल पाता।
इस कारण से, ब्लैक होल खुद काले दिखते हैं, क्योंकि वे रोशनी को परावर्तित नहीं करते। इनके चारों ओर गैस और धूल का एक घूमता हुआ छल्ला होता है, जिसे एक्रीशन डिस्क कहा जाता है। यह डिस्क इतनी गर्म हो जाती है कि एक्स-रे और अन्य रोशनी उत्पन्न करती है, जिससे वैज्ञानिक ब्लैक होल के बारे में जानकारी प्राप्त कर पाते हैं।
ब्लैक होल अपनी प्रचंड गुरुत्वाकर्षण शक्ति से दूर से आने वाले प्रकाश को मोड़ देते हैं, जैसे कोई लेंस रोशनी को मोड़ता है। इसके कारण ब्लैक होल के पीछे स्थित वस्तुओं की छवि बड़ी और विकृत दिखाई देने लगती है। वैज्ञानिक इसी प्रभाव का उपयोग उन छिपे हुए ब्लैक होल का पता लगाने के लिए करते हैं जो स्वयं अदृश्य होते हैं। इसे ग्रेविटेशनल लेंसिंग कहा जाता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ब्लैक होल्स के बारे में जानकारी प्रदान करती है। नासा के अनुसार, ब्लैक होल्स के बीच में एक बिंदु होता है जहाँ सब कुछ घनत्व में बदल जाता है, जिसे इवेंट होराइजन कहा जाता है। यह एक अदृश्य रेखा है, इसके पार जाने वाला कुछ भी वापस नहीं आ सकता, यहाँ तक कि रोशनी भी नहीं। हमारे मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है, जिसका नाम सैजिटेरियस ए स्टार है। यह सूर्य से ४० लाख गुना भारी है।
रोचक बात यह है कि यदि कोई वस्तु ब्लैक होल के बहुत निकट पहुँच जाए, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वह लंबाई में खिंचकर नूडल जैसी हो जाती है। इसे स्पेगेटीफिकेशन कहा जाता है। सबसे बड़ा ज्ञात ब्लैक होल टीओएन ६१८ है, जो सूर्य से ६६० अरब गुना भारी है। सबसे छोटा ज्ञात ब्लैक होल सूर्य से केवल ३.८ गुना भारी है। सभी ब्लैक होल घूमते हैं, कुछ इतनी तेजी से कि वे एक सेकंड में १ हजार से अधिक बार चक्कर लगाते हैं।
ब्लैक होल न तो वर्महोल हैं और न ही सब कुछ खींचने वाला वैक्यूम क्लीनर। ब्लैक होल तब बनता है जब बड़े तारे अपने जीवन का अंत करते हैं और सुपरनोवा में फट जाते हैं। दूर से इनका प्रभाव सामान्य तारों जैसा ही होता है। ये ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक हैं, जिन्हें समझने के लिए वैज्ञानिक निरंतर प्रयास कर रहे हैं।