क्या चंबा के एलीमेंट्री शिक्षा डिप्टी डायरेक्टर ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को फोन से दूर रखें?
सारांश
Key Takeaways
- फोन का अधिक उपयोग बच्चों की रचनात्मकता को प्रभावित करता है।
- अभिभावकों को बच्चों का स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना चाहिए।
- सकारात्मक गतिविधियाँ बच्चों के मानसिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
- शारीरिक गतिविधियों और खेलों का महत्व समझें।
- बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
चंबा, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फोन का अधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और दृष्टि पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि अत्यधिक फोन उपयोग से बच्चों की रचनात्मकता में कमी आती है।
चंबा में शीतकालीन अवकाश आरंभ हो चुके हैं, और चंबा के एलीमेंट्री शिक्षा के डिप्टी डायरेक्टर बलबीर सिंह ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों को फोन से दूर रखें और इसके कम से कम उपयोग को सुनिश्चित करें।
डिप्टी डायरेक्टर बलबीर सिंह ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि अवकाश के दौरान बच्चों को फोन से दूर रखने का प्रयास करें और उन्हें सृजनात्मक कार्यों में संलग्न करें। बच्चों को किताबों से डिक्शनरी बनाना, स्त्रीलिंग और पुल्लिंग शब्दों को अलग करना और पुरानी कहानियों का अध्ययन सिखाएं। इसके साथ ही उन्हें अपने आस-पास के इलाकों में घूमने दिया जाए, ताकि वे नए अनुभव प्राप्त कर सकें।
उन्होंने आगे बताया कि बच्चों द्वारा फोन के उपयोग में वृद्धि इतनी हो गई है कि विदेशों में कई क्लिनिक स्थापित हो गए हैं, जो बच्चों को फोन से दूर रहने में मदद कर रहे हैं। इसे एक बीमारी के रूप में देखा जा रहा है।
चंबा के डिप्टी डायरेक्टर बलबीर सिंह ने बच्चों से भी अपील की कि वे किताबों में ध्यान लगाएं और पुराने पत्रों को हल करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह समझना चाहिए कि वे किस विषय में कमजोर हैं और उसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अपने माता-पिता की सलाह मानें और रोजाना अखबार पढ़ें।
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार मोबाइल का प्रयोग बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए, अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को योग, व्यायाम, किताब पढ़ने, चित्रकला, संगीत और बाहरी खेलों जैसी सकारात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
ध्यान दें कि जिन्हें फोन की लत लग जाती है, उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है, जिससे बच्चे कम उम्र में नींद की कमी, मोटापे और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना अत्यावश्यक है।