सीजे रॉय आत्महत्या केस: एसआईटी ने बताया डिप्रेशन बनी वजह, आईटी रेड का नहीं था असर
सारांश
Key Takeaways
- सीजे रॉय की आत्महत्या का मुख्य कारण डिप्रेशन था।
- आयकर छापे का आत्महत्या पर कोई असर नहीं पड़ा।
- रॉय पिछले कुछ महीनों से वित्तीय दबाव में थे।
- एसआईटी ने मामले की गहन जांच की है।
- चार्जशीट अदालत में दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है।
बेंगलुरु, १० अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के प्रमुख व्यवसायी और कॉन्फिडेंट ग्रुप के संस्थापक-चेयरमैन सीजे रॉय की आत्महत्या के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच का समापन कर लिया है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि रॉय ने आयकर (आईटी) छापों के समय के दबाव के कारण नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी डिप्रेशन के चलते आत्महत्या की थी।
शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जांच एसआईटी को इसलिये सौंपी गई थी क्योंकि आरोप था कि आयकर अधिकारियों के दबाव में आकर रॉय ने आत्महत्या की। हालांकि, जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो बाहरी दबाव की पुष्टि करता हो।
एसआईटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि सीजे रॉय लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने घटना के करीब एक महीने पहले दवाइयां लेना बंद कर दिया था।
अधिकारियों का मानना है कि यही एक बड़ा कारण हो सकता है जिसने उन्हें इस आत्मघाती कदम के लिए मजबूर किया। हालांकि, उनके डिप्रेशन की असली वजह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार, ३० जनवरी को बेंगलुरु स्थित उनके कार्यालय में आयकर विभाग की छापेमारी चल रही थी। उसी दौरान सीजे रॉय ने अपने केबिन में खुद को गोली मार ली। पुलिस के अनुसार, उस समय वह अकेले थे। गोली की आवाज सुनते ही आयकर अधिकारी अंदर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि छापे के दौरान उनसे लगभग एक घंटे तक पूछताछ की गई थी और कुछ अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया था। एक सेट दस्तावेज देने के बाद वे अपने कमरे में लौटे और आत्महत्या कर ली।
पुलिस के अनुसार, रॉय पिछले कुछ महीनों से भारी वित्तीय दबाव में थे। उनके व्यापारिक लेन-देन केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में थे, खासकर बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल हुए फंड के स्रोत के संबंध में। निवेशकों का दबाव और टैक्स अधिकारियों की पूछताछ ने उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया था।
एसआईटी ने इन सभी पहलुओं (आयकर छापे की प्रक्रिया, वित्तीय रिकॉर्ड, परिवार के बयान और सहयोगियों की गवाही) का विस्तार से अध्ययन किया है। अब जब जांच पूरी हो गई है, तो चार्जशीट अदालत में दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने पहले कहा था कि जांच में सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा और अंतिम रिपोर्ट के बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। अब एसआईटी की रिपोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है।