क्या मध्य प्रदेश में भागीरथपुरा त्रासदी और मनरेगा में बदलावों को लेकर कांग्रेस की न्याय यात्रा निकलेगी?
सारांश
Key Takeaways
- भागीरथपुरा त्रासदी और मनरेगा के बदलावों के खिलाफ कांग्रेस की न्याय यात्रा।
- भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाना।
- न्यायिक जांच की मांग।
- मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा।
- कांग्रेस का मनरेगा बचाओ अभियान।
भोपाल, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश कांग्रेस आज सुबह 11 बजे इंदौर में भागीरथपुरा पानी त्रासदी और मनरेगा में हाल ही में हुए बदलावों के विरोध में राज्य स्तरीय न्याय यात्रा का आयोजन करेगी।
पार्टी के नेताओं ने बताया कि यह मार्च बड़े गणपति मंदिर से आरंभ होगा और मां अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति के पास राजवाड़ा चौक तक जाएगा। इसमें वरिष्ठ नेताओं, चुने हुए प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और नागरिकों का शामिल होना अपेक्षित है।
भोपाल में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, भोपाल शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की।
प्रवीण सक्सेना ने भागीरथपुरा घटना को "सरकार द्वारा प्रायोजित हत्याएं" बताया और भाजपा सरकार पर आपराधिक लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जहरीले पानी के कारण बीस लोगों की मौत हुई और एक हजार से अधिक लोग बीमार पड़े।
कांग्रेस ने इंदौर के मेयर को तुरंत हटाने, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से प्रेस में असंवेदनशील बयान देने के लिए इस्तीफा देने और मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपए के बजाय 1 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग की। पार्टी ने न्यायिक जांच और ज़िम्मेदारों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के मामले दर्ज करने की भी मांग की।
भाजपा सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए पीसी शर्मा ने कहा कि चौहान के कार्यकाल से मध्य प्रदेश पर 4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। उन्होंने कहा कि मनरेगा खर्च में नया 60:40 का अनुपात राज्य पर सालाना 5,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ डालेगा।
कांग्रेस ने इस नए कानून का विरोध किया और केंद्र सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। राहुल राज ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर मनरेगा को नए कानून से बदलने का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि इस कानून से राज्य के मौजूदा 4.5 लाख करोड़ रुपए के कर्ज में सालाना 5,000 करोड़ रुपए और जुड़ जाएंगे। उन्होंने फसल कटाई के मौसम में काम रोकने के प्रावधानों की आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे मजदूरों का पलायन बढ़ेगा।