दिल्ली-एनसीआर पटाखा प्रतिबंध: CJI सूर्यकांत बोले — 'सिर्फ बैन नहीं, जागरूकता भी ज़रूरी', अगली सुनवाई 15 अक्टूबर
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़े मामले में सुनवाई की, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत धार्मिक भावनाओं को आहत किए बिना इस मुद्दे पर व्यावहारिक और संतुलित रास्ता खोजना चाहती है। CJI ने कहा कि केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय जागरूकता अभियान और पटाखे चलाने के निर्धारित समय जैसे उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
अदालत की मुख्य टिप्पणियाँ
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि अदालत सीधे पटाखों पर प्रतिबंध का आदेश जारी करती है, तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है — लोग दिन में ही पटाखे जलाना शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में व्यावहारिक समाधान तलाशना ज़रूरी है, जो धार्मिक भावनाओं का सम्मान करे और मौजूदा परिस्थितियों को भी ध्यान में रखे।
उन्होंने नागरिकों और सिविल सोसायटी से अपील की कि वे मौजूदा स्थिति के प्रति जागरूक रहें और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझें। CJI ने यह भी कहा कि पटाखे चलाने के समय को कुछ निर्धारित घंटों तक सीमित रखने के लिए अभी पर्याप्त समय उपलब्ध है।
धर्म और पटाखों पर बहस
सुनवाई के दौरान एक वकील ने दलील दी कि पटाखे जलाना किसी भी धर्म के मौलिक अधिकार का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वकील के अनुसार, पूजा-अर्चना धार्मिक आस्था का हिस्सा हो सकती है, परंतु पटाखे जलाना उसके लिए अपरिहार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस संदर्भ में सीधा सवाल उठाया कि पटाखों का धर्म से आखिर क्या संबंध है। उनकी यह टिप्पणी उस व्यापक बहस को रेखांकित करती है जो हर साल दिवाली के मौसम में उठती है।
अदालत की सहायक की दलील
अदालत की सहायता कर रहीं अपराजिता सिंह ने तर्क दिया कि पटाखों के पक्ष में हर बार धार्मिक आस्था की आड़ ली जाती है, जबकि इनके स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भगवान को यह ज्ञात होता कि उनके नाम पर पटाखे जलाने के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, तो वे भी हैरान रह जाते।
उनकी दलील का केंद्र यह था कि धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसी किसी गतिविधि को उचित नहीं ठहराया जा सकता, जो बच्चों और बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाले।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर हर साल खतरनाक स्तर तक पहुँचता है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय इस विषय पर कई वर्षों से सुनवाई करता आ रहा है और पिछले वर्षों में भी पटाखों पर आंशिक प्रतिबंध के आदेश दिए जा चुके हैं। यह मामला केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक क्षमता तीनों के संतुलन का है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है, जो दिवाली से पहले होगी। माना जा रहा है कि अदालत तब तक सरकार और संबंधित पक्षों से ठोस सुझाव माँग सकती है। CJI की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि इस बार अदालत संपूर्ण प्रतिबंध के बजाय समयबद्ध और जागरूकता-आधारित ढाँचे की ओर झुकी हुई है।