क्या धर्म ही पूरी सृष्टि का संचालक है: मोहन भागवत?

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क्या धर्म ही पूरी सृष्टि का संचालक है: मोहन भागवत?

सारांश

मोहन भागवत ने धर्म को सृष्टि का संचालक बताया। उन्होंने कहा कि धर्म के बिना कोई भी चीज नहीं रह सकती। यह विचार महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे समाज और संस्कृति की गहराई का पता चलता है। जानें, धर्म के महत्व और उसकी भूमिका के बारे में उनके विचार कैसे देश को एक नई दिशा दे सकते हैं।

Key Takeaways

  • धर्म
  • हर व्यक्ति का अपना धर्म और कर्तव्य होता है।
  • धर्म के बिना कोई भी चीज नहीं रह सकती।
  • समाज के लिए धर्म का पालन आवश्यक है।
  • धर्म, सेवा और निष्ठा का प्रतीक है।

मुंबई, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि धर्म ही पूरी सृष्टि का संचालक है। जब सृष्टि का निर्माण हुआ, तब उसे चलाने के लिए जो नियम बनाए गए, वही धर्म है। पूरी दुनिया उन्हीं नियमों पर आधारित है। इसलिए कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से अधर्मी नहीं हो सकता। राज्य भले ही सेकुलर हो, लेकिन मनुष्य, प्रकृति या सृष्टि की कोई भी चीज धर्म के बिना नहीं रह सकती।

संघ प्रमुख ने यह बात मुंबई में आयोजित ‘विहार सेवक ऊर्जा मिलन’ कार्यक्रम में कही।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पानी का धर्म बहना है और आग का धर्म जलाना है। इसी तरह हर व्यक्ति का अपना-अपना धर्म एवं कर्तव्य होता है, जैसे पुत्र धर्म, राजधर्म और समाज धर्म। ये नियम और अनुशासन हमारे पूर्वजों ने गहरे आध्यात्मिक चिंतन और कठिन साधना से समझे। उन्होंने पैदल-पैदल देशभर में घूमकर, बिना भाषण दिए भी, आम लोगों के जीवन में धर्म को समाहित कर दिया। इसलिए भारतवर्ष की रग-रग में धर्म बसता है।

उन्होंने कहा कि उनके पास कोई ड्राइवर नहीं है, लेकिन उन्हें, पीएम नरेंद्र मोदी और हम जैसे अनेक लोगों को चलाने वाली एक ही शक्ति है। वही शक्ति आपको भी संचालित कर रही है। अगर हम उस शक्ति द्वारा चलायी जा रही गाड़ी में बैठे हैं, तो हमारा कभी एक्सीडेंट नहीं होगा। उस ड्राइवर का नाम है—धर्म। धर्म ही पूरी सृष्टि का ड्राइवर है। सृष्टि के चलने का नियम ही धर्म है और सब कुछ उसी पर निर्भर है।

भागवत ने कहा कि परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। वे उसकी इच्छा से आती-जाती हैं। अगर उसकी इच्छा होगी तो हम केवल निमित्त बनेंगे और परिस्थिति बदल जाएगी। अगर नहीं बदली, तो भी कोई नुकसान नहीं है। कम से कम हम अच्छा जीवन जीते हुए, अच्छे कर्म करते हुए, अच्छे स्थान को प्राप्त करेंगे। इसी निष्ठा के साथ हमें अहंकार से मुक्त होकर सबको साथ लेकर सेवा करते रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज देश में धर्म का बल मजबूती से खड़ा हो रहा है। जब यह धर्म पूरी तरह खड़ा होगा, तब देश अपनी सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर फिर से विश्व गुरु बनेगा। भारतवर्ष परम वैभव और बल से संपन्न होकर विश्व मंच पर अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन हम इन्हीं आंखों से देखेंगे। बस एक ही शर्त है कि हमें धर्म पर अडिग रहना है और सेवा करते रहना है।

मोहन भागवत ने युवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां मौजूद युवाओं में एक अंदरूनी शक्ति है। भक्तिभाव से भरा हुआ मन और सेवा की भावना संतों का स्वभाव होती है। संत दूसरों के छोटे से गुण को भी बड़ा बनाकर देखते हैं। उन्होंने कहा कि जो बात मंच से कही गई है, वह वे उसी भावना से स्वीकार कर रहे हैं।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाती है कि धर्म हमारे जीवन में एक आवश्यक तत्व है। ऐसे समय में जब सेकुलरिज्म पर चर्चा हो रही है, यह महत्वपूर्ण है कि हम धर्म के सकारात्मक पहलुओं को समझें और उसे अपने जीवन में लागू करें।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

धर्म का क्या महत्व है?
धर्म मानवता के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करता है और समाज को एकजुट करता है।
मोहन भागवत ने धर्म के बारे में क्या कहा?
मोहन भागवत ने कहा कि धर्म ही सृष्टि का संचालक है और इसके बिना कुछ भी नहीं चल सकता।
क्या धर्म और राज्य में कोई संबंध है?
राज्य भले ही सेकुलर हो, लेकिन व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में धर्म का महत्व बना रहता है।
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