धर्मेंद्र प्रधान ने न्यायपालिका पर विवादित अध्याय के लेखकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी
सारांश
Key Takeaways
- न्यायपालिका का सम्मान: केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने न्यायपालिका के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
- विवादित अध्याय: एनसीईआरटी की पुस्तक में न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ थीं।
- कार्रवाई का आश्वासन: लेखकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- जांच प्रक्रिया: एनसीईआरटी के खिलाफ जांच की जाएगी।
- नई किताब: अध्याय को पुनः लिखा जाएगा और नई किताब 2026-27 में उपलब्ध होगी।
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनसीईआरटी की एक पुस्तक को लेकर खेद व्यक्त किया है, जिसमें न्यायपालिका के संदर्भ में कुछ विवादास्पद बातें लिखी गई थीं। यह अध्याय कक्षा आठ की एक पुस्तक में शामिल था, जिसे अब वापस ले लिया गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि इस पुस्तक में लिखे गए अध्याय के लेखकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस संदर्भ में जांच की बात भी की। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के प्रति अपमान की किसी भी प्रकार की मंशा नहीं थी।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "हम न्यायपालिका का आदर करते हैं। न्यायपालिका द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करेंगे। जो कुछ हुआ है, उसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ।"
उन्होंने कहा कि जब यह मुद्दा उनके संज्ञान में आया, तो उन्होंने तुरंत एनसीईआरटी को निर्देश देकर सभी किताबों को वापस लेने का आदेश दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि आगे के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि ये किताबें आगे वितरित न की जाएं। न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। जो घटना हुई है, उसे हम गंभीरता से लेते हैं। इस मामले में एनसीईआरटी के खिलाफ जांच की जाएगी और जो भी लोग उस अध्याय को तैयार करने में शामिल थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। हम न्यायपालिका को आश्वस्त करते हैं कि ऐसी गलती दोबारा न हो।
गौरतलब है कि एनसीईआरटी ने 24 फरवरी को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब जारी की थी। किताब के एक अध्याय में कुछ ऐसी बातें थीं, जो आपत्तिजनक मानी गईं। यह अध्याय "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका" शीर्षक से है और पृष्ठ 125 से 142 तक फैला हुआ है। जब यह मामले का खुलासा हुआ, तो स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने तुरंत इस किताब का वितरण रोकने के निर्देश दिए। एनसीईआरटी ने इस आदेश का पालन करते हुए किताब की आपूर्ति पर रोक लगा दी। इस अध्याय में न्यायपालिका और न्याय व्यवस्था के बारे में नकारात्मक टिप्पणियाँ की गई थीं। इस पर कई न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
एनसीईआरटी ने भी आधिकारिक तौर पर कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है और इसे संविधान और लोगों के अधिकारों का रक्षक मानती है। परिषद ने यह भी कहा कि जो गलती हुई, वह अनजाने में हुई है। किसी भी संस्था की गरिमा को कम करने का कोई इरादा नहीं था।
एनसीईआरटी के अनुसार, इस अध्याय को फिर से लिखा जाएगा और नई किताब शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। परिषद ने इस गलती पर खेद प्रकट करते हुए माफी भी मांगी है और कहा है कि भविष्य में ऐसी गलती न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।