दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा: आलू बुवाई कर रहे किसानों से मिले, खाद-बिजली संकट सुना
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के तीसरे दिन सड़क किनारे खेतों में आलू की बुवाई कर रहे किसानों के बीच पहुँचे और उनकी समस्याएँ सुनीं। किसानों ने खाद की किल्लत, बिजली संकट और आलू का उचित मूल्य न मिलने जैसी गंभीर परेशानियाँ उनके सामने रखीं।
यात्रा का तीसरा दिन और किसानों से संवाद
उज्जैन से अयोध्या तक चलने वाली इस यात्रा की शुरुआत विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद हुई थी। यात्रा के तीसरे दिन दिग्विजय सिंह उन किसानों के पास रुके, जो सड़क किनारे अपने खेतों में आलू की बुवाई में जुटे थे। इस संवाद के दौरान किसानों ने जमीनी हकीकत से उन्हें रू-ब-रू कराया।
किसानों की मुख्य समस्याएँ
किसानों ने बताया कि आलू की बुवाई के समय खाद उपलब्ध नहीं हो रहा है। टोकन प्रणाली के माध्यम से खाद वितरण की व्यवस्था होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही बिजली की अनियमित आपूर्ति भी सिंचाई और खेती के कामकाज को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
किसानों ने आलू की पिछली फसल का हवाला देते हुए बताया कि बाजार में इतना कम भाव मिला कि लागत तक नहीं निकल पाई। जिन किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में आलू रखा, उन्हें भंडारण का किराया चुकाने लायक भी दाम नहीं मिले। यह स्थिति किसानों की आर्थिक बदहाली की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।
किसान की पीड़ा और दिग्विजय सिंह का संदेश
एक किसान ने दिग्विजय सिंह से अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि देश में वोट चोरी और चंदा चोरी के साथ-साथ खाद की भी चोरी हो रही है। उस किसान ने कहा कि 'आप हमारी भी आवाज हैं।' किसानों की इन समस्याओं को सुनने के बाद दिग्विजय सिंह ने इस मुलाकात को धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी साझा की।
सिंह ने कहा, 'जगतनंदिनी माता सीता भूमिजा थीं, जिनका प्राकट्य धरती माता की कोख से हुआ था। यह हमें स्मरण कराता है कि हमारी भूमि केवल अन्न ही नहीं, आस्था और संस्कृति की भी जननी है। किसान इसी पवित्र धरती का सेवक और अन्नदाता हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस धर्म में धरती माता है और माता सीता भूमिजा हैं, उस धर्म में मिट्टी का सम्मान और किसान का स्वाभिमान सर्वोपरि होना चाहिए।
यात्रा का उद्देश्य और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह यात्रा उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन पर समाप्त होगी। यात्रा में साधु-संत और आम नागरिक दोनों की भागीदारी है, और दिग्विजय सिंह लगातार विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश के किसान खेती की बढ़ती लागत और उपज के गिरते दामों से जूझ रहे हैं।
आगे क्या होगा
यात्रा के आगे के पड़ावों में भी दिग्विजय सिंह के किसानों, साधु-संतों और आम नागरिकों से संवाद जारी रहने की उम्मीद है। किसानों की समस्याओं को राजनीतिक मंच पर उठाते हुए यह यात्रा कांग्रेस की किसान-केंद्रित राजनीति की दिशा को रेखांकित कर सकती है।