चुनाव आयोग ने नंदीग्राम से तृणमूल उम्मीदवार पवित्र कर के खिलाफ शिकायत पर की एफआईआर दर्ज
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय चुनाव आयोग ने पवित्र कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
- सुवेंदु अधिकारी की शिकायत ने इस कार्रवाई को प्रेरित किया।
- नंदीग्राम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा।
कोलकाता, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय चुनाव आयोग ने भाजपा के उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी द्वारा की गई शिकायत के बाद नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार पवित्र कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आयोग ने बताया कि यह शिकायत गुरुवार की सुबह प्राप्त हुई थी।
बुधवार को, सुवेंदु अधिकारी हल्दिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा की तैयारियों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसके बाद, उन्होंने भाजपा कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं चुनाव आयोग से यह पूछना चाहता हूँ कि किस कानून के तहत भारत का कोई वयस्क नागरिक एक ही समय में दो राजनीतिक पार्टियों का सदस्य बन सकता है?"
पवित्र कर ने पंचायत चुनावों में भाजपा की टिकट पर जीत हासिल की थी। लेकिन 17 मार्च 2026 को, उन्होंने तृणमूल के महासचिव अभिषेक बनर्जी का हाथ थामकर तृणमूल पार्टी में शामिल हो गए। उसी दिन उन्हें नंदीग्राम विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "वह बोयाल ग्राम पंचायत से भाजपा के सदस्य हैं। और अब वह विधानसभा चुनाव में तृणमूल के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहे हैं। मुझे जानकारी है कि उन्होंने भाजपा से इस्तीफा नहीं दिया है। यदि मैं इस पर आपत्ति करता हूं, तो उनकी उम्मीदवारी रद्द हो जाएगी।"
इन आरोपों के जवाब में पवित्र कर ने कहा, "मैं इस मामले की जानकारी नहीं रखता हूं। लेकिन मैं जो भी कदम उठाऊंगा, वह पूरी तरह से कानूनी होगा।"
यह ध्यान देने योग्य है कि यदि कोई राजनीतिक नेता पार्टी बदलकर चुनाव लड़ता है और वह पहले किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी से जन प्रतिनिधि रहा है, तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना अनिवार्य है।
सुवेंदु अधिकारी की शिकायत के आधार पर चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पवित्र कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई।
इस बीच, पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। वोटों की गिनती के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। नंदीग्राम में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान होगा।
चुनाव आयोग ने राज्य में निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सभी विधानसभा सीटों पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके।