क्या राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली?

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क्या राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली?

सारांश

लखनऊ में गणतंत्र दिवस समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ध्वज फहराकर परेड की सलामी ली। इस भव्य समारोह ने नई ऊर्जा और देशभक्ति का संचार किया। जानिए इस परेड की खास बातें और झांकियों की महत्ता।

Key Takeaways

  • गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन लखनऊ में हुआ।
  • राज्यपाल ने ध्वज फहराकर परेड की सलामी ली।
  • परेड में विभिन्न विभागों की झांकियां शामिल थीं।
  • 150 वर्षों की वंदे मातरम् की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
  • राज्यपाल ने उत्कृष्ट सेवा पदक प्रदान किए।

लखनऊ, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विधान भवन लखनऊ के समक्ष ध्वज फहराते हुए भव्य गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली और परेड का अवलोकन किया। राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक वैभव से सजी इस परेड ने उपस्थित जनसमूह को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत कर दिया।

इस परेड में भारतीय सेना, पुलिस बल, पीएसी, होमगार्ड्स और विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने आकर्षक मार्च-पास्ट पेश किया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों एवं विद्यालयों की भव्य झांकियों तथा स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत समूह नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में ‘वंदे मातरम्’ की थीम पर जन भवन की झांकी एवं बैण्ड विशेष आकर्षण का केंद्र बने।

गणतंत्र दिवस-2026 की परेड में जनभवन स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय के 37 विद्यार्थियों के बैंड ने अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट संगीतात्मक समन्वय का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कठोर प्रशिक्षण के उपरांत प्रस्तुत संतुलित वाद्ययंत्र संयोजन और सुसंगठित कदमताल ने दर्शकों की सराहना बटोरी। ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में प्रस्तुत जन भवन की झांकी राष्ट्रवंदना की सजीव अभिव्यक्ति रही।

झांकी में भारत माता की विराट प्रतिमा, ‘वंदे मातरम्’ से अंकित भारत का मानचित्र, राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय लेखन मुद्रा में, और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर वाचन मुद्रा में विराजमान दिखाई दिए। विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में सजे बालक-बालिकाओं ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावपूर्ण झलक प्रस्तुत की। यह झांकी स्वतंत्रता संग्राम के वीर बलिदानियों को समर्पित रही, जहाँ ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ त्याग, तपस्या और अदम्य साहस की अमर गाथा सजीव हुई। साथ ही आधुनिक और विकसित भारत का तेजस्वी स्वरूप भी प्रदर्शित किया गया।

चंद्रयान मिशन, ब्रह्मोस, अग्नि एवं पृथ्वी मिसाइलों तथा स्वदेशी टैंक के मॉडल भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, आत्मनिर्भरता और सुदृढ़ रक्षा क्षमता का प्रभावशाली संदेश देते नजर आए। इसके पूर्व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आज जन भवन, लखनऊ में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने जन भवन में उपस्थित समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सुरक्षाकर्मियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं तथा बच्चों को मिष्ठान वितरित किया।

इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा वर्ष 2024 गृह मंत्रालय, भारत सरकार का अति उत्कृष्ट सेवा पदक मुख्य आरक्षी अजमत अली, मुख्य आरक्षी जनार्दन मिश्रा, मुख्य आरक्षी (चालक) तीर्थराज पाल तथा उत्कृष्ट सेवा पदक मुख्य आरक्षी मोहम्मद नदीम को प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश का सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह मुख्य आरक्षी (कमांडो) विजय पाल यादव एवं निरीक्षक बृजेश भारद्वाज को पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश का प्रशंसा चिन्ह (स्वर्ण) प्रदान कर सम्मानित किया गया।

राज्यपाल ने सभी कार्मिकों को उनके समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इससे पूर्व राज्यपाल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

Point of View

बल्कि यह हमारी सामूहिक पहचान और राष्ट्र की प्रगति का भी प्रतीक है। हमें अपने परंपराओं और उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य उद्देश्य क्या है?
गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य उद्देश्य देश की संस्कृति, एकता और शक्ति को प्रदर्शित करना है।
इस वर्ष की परेड में कौन-कौन शामिल थे?
इस वर्ष की परेड में भारतीय सेना, पुलिस बल, होमगार्ड्स और विभिन्न विद्यालयों के छात्र शामिल थे।
वंदे मातरम् की झांकी क्यों विशेष थी?
वंदे मातरम् की झांकी 150 वर्षों का प्रतीक है और यह स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को समर्पित है।
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