ग्रेटर नोएडा: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 5 करोड़ रुपये का गंभीर फर्जीवाड़ा, 12 आरोपियों पर केस दर्ज
सारांश
Key Takeaways
- गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 5 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ।
- 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
- छात्रों की फीस में अनियमितता सामने आई है।
- पुलिस जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
ग्रेटर नोएडा, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के एक बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है, जिसने पूरे परिसर में हड़कंप मचा दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस गंभीर अनियमितता को लेकर थाना ईकोटेक प्रथम में मुकदमा दर्ज कराया है।
यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रभारी सीके सिंह की शिकायत पर की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यह फर्जीवाड़ा लगभग 5 करोड़ रुपये का है, जो छात्रों द्वारा जमा की गई फीस से संबंधित है। इस मामले में विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी समेत कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। अन्य आरोपियों में पूर्व वित्त अधिकारी नीरज कुमार, लेखाधिकारी शिलेंद्र कुमार, मुदित कुमार, विजय प्रताप सिंह, मुकेश पांडे, शिव कुमार खत्री, शिवम, संदीप, श्याम, नवीन और सुभाष शामिल हैं।
रजिस्ट्रार प्रभारी सीके सिंह का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर छात्रों की फीस में बड़ा घोटाला किया। जांच में पाया गया है कि छात्रों से फीस तो ली गई, लेकिन उसे विश्वविद्यालय के बैंक खाते में जमा नहीं कराया गया। इसके बजाय, फर्जी यूपीआई लेन-देन की रसीदें बनाकर उन्हें विश्वविद्यालय के शुल्क संग्रह सॉफ्टवेयर में दर्ज किया गया, ताकि रिकॉर्ड में दर्शाया जा सके कि फीस जमा हो गई है।
प्रारंभिक जांच में पिछले एक वर्ष के दस्तावेजों की पड़ताल की गई है, जिसमें लगभग 5 करोड़ रुपये की अनियमितता उजागर हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि डॉ. विश्वास त्रिपाठी के पूरे पांच साल के कार्यकाल की गहन जांच की जाती है, तो घोटाले की राशि और भी बढ़ सकती है। इस गंभीर वित्तीय घोटाले के खुलासे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच चिंता का माहौल है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और विश्वविद्यालय की वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।