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प्रथम विश्व युद्ध के 74,000 भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि: 30 अप्रैल को दिल्ली विधानसभा में जनरल वीके सिंह करेंगे सेमिनार की अध्यक्षता

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प्रथम विश्व युद्ध के 74,000 भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि: 30 अप्रैल को दिल्ली विधानसभा में जनरल वीके सिंह करेंगे सेमिनार की अध्यक्षता

सारांश

108 साल पहले इसी इमारत में वायसराय ने भारतीय सैनिकों को युद्ध में भेजने का सम्मेलन बुलाया था — और 74,000 से अधिक सैनिकों ने विदेशी मिट्टी में जान दी। 30 अप्रैल को उसी सदन में जनरल वीके सिंह और दिल्ली के विधायक उन गुमनाम शहीदों को याद करेंगे, जिन्हें इतिहास ने लंबे समय तक भुला दिया।

मुख्य बातें

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के.
सिंह 30 अप्रैल 2026 को दिल्ली विधानसभा में 'वॉर कॉन्फ्रेंस' की 108वीं वर्षगांठ पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता करेंगे।
प्रथम विश्व युद्ध में 13 लाख भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से सेवा दी, जिनमें से 74,000 से अधिक ने विदेशी धरती पर प्राण न्योछावर किए।
ऐतिहासिक 'वॉर कॉन्फ्रेंस' 27-29 अप्रैल 1918 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने बुलाई थी; महात्मा गांधी भी उपस्थित थे।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 28 अप्रैल को विधायकों के साथ एक मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में 1918 की बैठक की कार्यवाही पर आधारित एक विशेष प्रकाशन भी जारी किया जाएगा।

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह 30 अप्रैल 2026 को दिल्ली विधानसभा में औपनिवेशिक काल के ऐतिहासिक 'वॉर कॉन्फ्रेंस' की 108वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक विशेष सेमिनार की अध्यक्षता करेंगे। इस अवसर पर वे दिल्ली के विधायकों के साथ मिलकर उन 74,000 से अधिक भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में विदेशी धरती पर अपने प्राणों की आहुति दी थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1918 का वॉर कॉन्फ्रेंस

एक अधिकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम 28 अप्रैल 1918 को दिल्ली विधानसभा भवन में आयोजित सम्मेलन के 108 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखा गया है। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने 27, 28 और 29 अप्रैल 1918 को इसी ऐतिहासिक इमारत में यह 'युद्ध सम्मेलन' बुलाया था, जिसमें पूरे देश से लगभग 120 प्रतिनिधि एकत्र हुए थे — इनमें रियासतों के शासक, प्रांतों के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय नेता शामिल थे। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था — प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भूमिका।

गौरतलब है कि इसी सम्मेलन में महात्मा गांधी भी उपस्थित थे और उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के साथ भारत के पूर्ण सहयोग का समर्थन किया था। उनका मानना था कि युद्ध में भारत की निष्ठा का प्रतिफल 'स्वराज' या 'स्व-शासन' के रूप में मिलेगा। इतिहास गवाह है कि यह भरोसा टूटा।

30 अप्रैल के कार्यक्रम में क्या होगा

अधिकारी ने बताया कि जनरल वी.के. सिंह सेमिनार में मुख्य भाषण देंगे और औपनिवेशिक काल की उस बैठक की कार्यवाही को पुनः प्रस्तुत करने वाला एक विशेष प्रकाशन भी जारी करेंगे। मंगलवार, 28 अप्रैल को ही दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधायकों के साथ मिलकर उन सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने विदेशी धरती पर अपने प्राण न्योछावर किए।

स्पीकर गुप्ता ने इस अवसर पर एक मिनट का मौन रखने का आह्वान करते हुए कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

और बदले में मिला रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग। यह विडंबना है कि जिस इमारत में वायसराय ने भर्ती की अपील की थी, आज उसी में चुने हुए भारतीय प्रतिनिधि उन शहीदों को याद कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह श्रद्धांजलि इन गुमनाम सैनिकों को पाठ्यपुस्तकों और राष्ट्रीय स्मृति में स्थायी स्थान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की शुरुआत बनेगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

30 अप्रैल को दिल्ली विधानसभा में क्या कार्यक्रम होगा?
30 अप्रैल 2026 को दिल्ली विधानसभा में 'वॉर कॉन्फ्रेंस' की 108वीं वर्षगांठ पर एक सेमिनार आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह करेंगे। इस दौरान प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और 1918 की बैठक की कार्यवाही पर आधारित एक प्रकाशन भी जारी किया जाएगा।
1918 का 'वॉर कॉन्फ्रेंस' क्या था?
27 से 29 अप्रैल 1918 के बीच तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने दिल्ली के पुराने सचिवालय भवन में यह सम्मेलन बुलाया था। इसमें देशभर से लगभग 120 प्रतिनिधि शामिल हुए थे और प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भूमिका पर चर्चा हुई थी; महात्मा गांधी भी इसमें उपस्थित थे।
प्रथम विश्व युद्ध में कितने भारतीय सैनिकों ने भाग लिया और कितने शहीद हुए?
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता के बयान के अनुसार, प्रथम विश्व युद्ध में फ्लैंडर्स से लेकर गैलीपोली और मेसोपोटामिया तक लगभग 13 लाख भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से सेवा दी। इनमें से 74,000 से अधिक सैनिकों ने विदेशी धरती पर अपने प्राण न्योछावर किए।
दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक विरासत क्या है?
दिल्ली विधानसभा का वर्तमान भवन 'पुराना सचिवालय' है, जिसका निर्माण 1912 में हुआ था और जिसे ई. मोंटेग्यू थॉमस ने डिजाइन किया था। 17 जनवरी 1913 को इसी भवन में केंद्रीय विधान परिषद की पहली बैठक हुई थी, जिसमें गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय और पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे नेताओं ने भाग लिया था।
महात्मा गांधी का 1918 के वॉर कॉन्फ्रेंस से क्या संबंध था?
1918 के वॉर कॉन्फ्रेंस में महात्मा गांधी स्वयं उपस्थित थे और उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के साथ भारत के पूर्ण सहयोग का समर्थन किया था। उनका विश्वास था कि युद्ध में भारत की निष्ठा के बदले 'स्वराज' मिलेगा, लेकिन इसके बजाय रॉलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग नरसंहार जैसी दमनकारी घटनाएँ हुईं।
राष्ट्र प्रेस
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