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क्या गोपालपुर विधानसभा सीट पर जदयू के बागी गोपाल मंडल की विद्रोह से पार्टी को नया चेहरा मिलेगा?

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क्या गोपालपुर विधानसभा सीट पर जदयू के बागी गोपाल मंडल की विद्रोह से पार्टी को नया चेहरा मिलेगा?

सारांश

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र का विशेष महत्व है। जदयू के बागी गोपाल मंडल की विद्रोह ने राजनीति में हलचल मचा दी है। क्या नए चेहरे की एंट्री से पार्टी की किस्मत बदल जाएगी?

मुख्य बातें

गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र कृषि-प्रधान है।
यह ओबीसी समुदायों का गढ़ माना जाता है।
गोपाल मंडल ने जदयू के लिए इस सीट को मजबूत बनाया है।
जदयू ने इस बार नए चेहरे पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक विवादों ने जदयू को सिरदर्द दिया है।

भागलपुर, 27 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है। इस चुनाव में गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र खास सुर्खियों में है।

भागलपुर जिले के नौगछिया अनुमंडल में स्थित यह प्रखंड, गंगा नदी के किनारे बसा एक कृषि-प्रधान क्षेत्र है, जो धीरे-धीरे रेशम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध भागलपुरी सिल्क का हब बन रहा है। भागलपुर शहर से मात्र चार किलोमीटर दूर गोपालपुर, उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी के कारण धान, गेहूं और सब्जियों की खेती पर निर्भर है। आसपास के प्रमुख कस्बों में साबौर (5 किमी), नौगछिया (16 किमी) और बांका (20 किमी) शामिल हैं। 1957 में स्थापित यह विधानसभा क्षेत्र भागलपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जिसमें गोपालपुर, नौगछिया, रंगराचौक और इस्माइलपुर प्रखंड शामिल हैं।

चुनाव आयोग की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, गोपालपुर की कुल आबादी 4,78,224 है, जिसमें पुरुष 2,48,426 और महिलाएं 2,29,798 हैं। मतदाताओं की संख्या 2,77,227 है, जिसमें पुरुष 1,46,378, महिलाएं 1,30,836 और थर्ड जेंडर 13 हैं। गोपालपुर सामान्य सीट है, जो ओबीसी समुदायों का गढ़ मानी जाती है। पिछले 68 वर्षों में यहां से 16 विधायक चुने गए हैं।

शुरुआती आठ चुनावों में कांग्रेस ने पांच और सीपीआई ने तीन बार जीत हासिल की। बाद में भाजपा और जनता दल ने एक-एक बार सफलता पाई, लेकिन 2000 के बाद यह सीट जदयू और राजद के बीच का युद्धक्षेत्र बन गई। राजद ने 2000 और फरवरी 2005 में जीत दर्ज की, लेकिन अक्टूबर 2005 से जदयू ने लगातार चार बार कब्जा जमाया। जदयू के दिग्गज नेता गोपाल मंडल उर्फ नरेंद्र कुमार नीरज ने इस सीट को पार्टी का किला बना दिया। ओबीसी पृष्ठभूमि से आने वाले मंडल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रबल समर्थक माने जाते हैं।

2005 (अक्टूबर) में उन्होंने 48,049 वोटों से राजद के अमित राणा को हराया। 2010 में 53,876 वोटों से अमित राणा (28,816) पर जीत हासिल की। 2015 में गठबंधन टूटने के बावजूद महागठबंधन के खिलाफ भाजपा के अनिल कुमार यादव (52,234 वोट) से मात्र 5,169 वोटों के अंतर से बचे। 2020 में एनडीए के साथ फिर से आकर उन्होंने राजद के शैलेश कुमार (51,072) को 24,461 वोटों से धूल चटाई, जब कुल 1,62,823 वोट पड़े। 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए को गोपालपुर खंड में 39,432 वोटों की बढ़त मिली, जो भाजपा के मजबूत जनाधार को दर्शाता है।

हालांकि, गोपाल मंडल की लगातार जीत के बावजूद उनके विवादों ने जदयू के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया है। 2021 में ट्रेन में आपत्तिजनक व्यवहार से पार्टी की छवि धूमिल हुई। हाल ही में उन्होंने उपमुख्यमंत्री की मांग की और सहयोगियों पर वसूली का आरोप लगाया। इन विवादों के चलते एनडीए के सीट बंटवारे में गोपालपुर जदयू को मिली, लेकिन मंडल को टिकट से वंचित रखा गया। जेडीयू ने इस बार नए चेहरे शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल पर भरोसा जताया है।

इससे आहत गोपाल मंडल ने नीतीश कुमार के पटना स्थित निवास के बाहर धरना दिया। उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इसके बाद गोपाल मंडल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक गतिशीलता ने प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ लाने का संकेत दिया है। जदयू और राजद के बीच का यह संघर्ष न केवल स्थानीय मुद्दों से प्रभावित है, बल्कि यह पूरे बिहार की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र की विशेषताएं क्या हैं?
गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र, भागलपुर जिले में स्थित है और यह कृषि-प्रधान क्षेत्र है। यहां की उपजाऊ मिट्टी धान, गेहूं और सब्जियों की खेती के लिए जानी जाती है।
गोपाल मंडल की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
गोपाल मंडल जदयू के प्रमुख नेता हैं और उन्होंने इस क्षेत्र में लगातार चुनाव जीते हैं। वह नीतीश कुमार के समर्थक माने जाते हैं।
2025 के विधानसभा चुनाव में गोपालपुर का क्या महत्व है?
गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र 2025 के चुनाव में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ओबीसी समुदायों का गढ़ माना जाता है और यहां की राजनीतिक स्थिति पूरे बिहार पर प्रभाव डाल सकती है।
जदयू ने इस बार किसे उम्मीदवार बनाया है?
जदयू ने इस बार शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को उम्मीदवार बनाया है।
गोपाल मंडल का विद्रोह पार्टी के लिए क्या मायने रखता है?
गोपाल मंडल का विद्रोह जदयू के लिए एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि इससे पार्टी की छवि और चुनावी रणनीति पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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