गुरुग्राम इफको चौक से फरीदाबाद-नोएडा के लिए रैपिड मेट्रो लाइन का ऐलान: सीएम नायब सिंह सैनी
सारांश
Key Takeaways
- गुरुग्राम से फरीदाबाद और नोएडा के लिए रैपिड मेट्रो लाइन का निर्माण होगा।
- यह मेट्रो लाइन गुरुग्राम की मौजूदा मेट्रो से जड़ेगी।
- मुख्यमंत्री ने छछरौली गांव की जमीन का सर्वे करने की घोषणा की।
- राज्य सरकार ने संयुक्त सचिवालय का गठन किया है।
- नशा रोकने के अभियान में संतों और खाप प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
चंडीगढ़, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन बुधवार को सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रश्नकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकार से २० सवालों के जवाब मांगे। सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है।
विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हाउस अरेस्ट कर सरकार तानाशाही का कार्य कर रही है। इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारी पुलिस ने किसी को हाउस अरेस्ट नहीं किया है और न ही हमारे पास कोई ऐसी जानकारी है। मैंने कल भी कहा था कि चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर २५ का मैदान निर्धारित किया है, जहां प्रदर्शन किया जा सकता है।
इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सदन में बताया कि २४ फरवरी को एक बैठक में गुरुग्राम से फरीदाबाद और नोएडा के बीच बनने वाले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर के अंतिम एलाइनमेंट को मंजूरी दी गई। इस कॉरिडोर का ५२ किलोमीटर का हिस्सा हरियाणा में होगा। यह गुरुग्राम के इफको चौक से शुरू होकर फरीदाबाद और नोएडा को जोड़ेगा, जिससे परिवहन की सुविधा में सुधार होगा। यह गुरुग्राम की मेट्रो लाइन से भी जुड़ेगा और फरीदाबाद में १६ किलोमीटर का इंटीग्रेटेड सेक्शन जोड़ा जाएगा। इसकी जानकारी जल्दी ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर एक संयुक्त सचिवालय बनाया गया है, ताकि अंतर्राज्यीय तस्करी पर रोक लग सके। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं और मानस पोर्टल के माध्यम से सूचना मिलने पर पुलिस गुप्त पहचान रखते हुए कार्रवाई करती है। संतों और खाप प्रतिनिधियों को भी नशा रोकने के अभियान में शामिल किया गया है, फिर भी कुछ मामलों में बाहर से नशा लाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा, "१८८७ से अब तक सरकार के पास मालिकाना हक रहा। पूरा शहर सरकारी भूमि पर बसा है, यह गैर-मुमकिन आबादी के रूप में विकसित है। यहां सैकड़ों परिवार कई पीढ़ियों से रह रहे हैं, २०२० तक इन संपत्तियों की रजिस्ट्री होती रही, जिसमें लोगों का विश्वास और अधिकार जुड़े रहे। तकनीकी आधार पर इन लोगों को असुरक्षित नहीं रखा जा सकता। मैं आज छछरौली गांव की जमीन का विस्तृत सर्वे और रिकॉर्ड के माध्यम से उन्हें मालिकाना हक देने की घोषणा करता हूं।