क्या हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह छोड़ने का निर्णय लिया?

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क्या हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह छोड़ने का निर्णय लिया?

सारांश

साध्वी हर्षा रिछारिया ने पिछले एक साल में मानसिक उत्पीड़न का अनुभव किया है, जिसके कारण उन्हें आत्महत्या के विचार आए। वे अब अपने करियर में वापसी करने की सोच रही हैं। इस विशेष बातचीत में उन्होंने संत-समाज और समाज के मानदंडों पर सवाल उठाए हैं।

Key Takeaways

  • धर्म की राह छोड़ने का निर्णय
  • मानसिक उत्पीड़न के अनुभव
  • आत्महत्या के विचारों का सामना
  • महिलाओं के अधिकारों की आवश्यकता
  • सामाजिक मानदंडों पर सवाल

जबलपुर, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाकुंभ से साध्वी बनने के बाद लोकप्रियता हासिल करने वाली हर्षा रिछारिया एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने धर्म की राह छोड़ने का निर्णय लिया है।

उनका कहना है कि उन्हें इतना अधिक मानसिक उत्पीड़न सहना पड़ा कि पिछले एक साल से आत्महत्या के विचार उनके मन में आते रहे हैं। साध्वी हर्षा ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में संत-समाज पर निशाना साधा है।

एंकरिंग और मॉडलिंग में वापसी करने की इच्छा रखने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हर्षा रिछारिया ने कहा, "उस दिशा में कुछ भी गलत नहीं था। बस थोड़ी हलचल थी, कहीं आध्यात्मिक शोर था, कहीं पश्चिमी शैली का शोर, यही सब। लोग मुझे एंकर और अभिनेत्री के रूप में पहचानते थे। मेरी असली पहचान वहीं से शुरू हुई। बाद में कुछ लोग मुझे हर्षा रिछारिया के नाम से जानने लगे।

उन्होंने आगे कहा कि वे नहीं जाना चाहतीं, लेकिन इंसान को इतना तोड़ा जाता है कि उसे रास्ता बदलना पड़ता है। मैंने पहले भी कहा है कि यह मेरी मजबूरी है। मेरे मान, सम्मान, चरित्र और गरिमा को तोड़ने की कोशिश की गई है। समाज और धर्म के लोग यह तय कर रहे हैं कि मुझे क्या करना चाहिए, और वे बता रहे हैं कि मेरा चरित्र कैसा है।

हर्षा रिछारिया ने कहा कि पिछले एक साल से उन्होंने इतनी मानसिक परेशानी झेली है कि कई बार आत्महत्या जैसे विचार उनके मन में आए। उन्होंने कहा, "मैं कोई सीता नहीं हूं जो हर बार परीक्षा दूं। मेरी सहने की क्षमता की एक सीमा है, उसके बाद मुझे सहन नहीं होता, इसलिए मरने से आसान मुझे नया रास्ता चुनना लगा।"

हर्षा रिछारिया ने मकर संक्रांति के अवसर पर नर्मदा नदी में स्नान किया और कहा कि यह सिर्फ भगवान की इच्छा है। उन्होंने कहा, "मकर संक्रांति के पवित्र अवसर पर, जिसे वर्ष का पहला त्योहार माना जाता है, मुझे नर्मदा नदी के तट पर जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मेरे लिए अविश्वसनीय रूप से अद्भुत अनुभव था, और यह अप्रत्याशित रूप से हुआ। इसे मैं पूरी तरह से ईश्वर की इच्छा मानती हूं।"

Point of View

बल्कि पूरे समाज के लिए एक आईना है।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

हर्षा रिछारिया ने धर्म की राह क्यों छोड़ी?
हर्षा रिछारिया ने मानसिक उत्पीड़न के कारण धर्म की राह छोड़ने का निर्णय लिया।
क्या हर्षा रिछारिया ने आत्महत्या के विचारों का सामना किया?
जी हां, उन्होंने पिछले एक साल में आत्महत्या के विचारों का सामना किया।
हर्षा रिछारिया का अनुभव क्या दर्शाता है?
उनका अनुभव समाज में महिलाओं के प्रति मानसिकता और दबाव को उजागर करता है।
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