दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया ने जमा किए 50,000 रुपये के जमानत बांड
सारांश
Key Takeaways
- केजरीवाल और सिसोदिया ने जमानत बांड जमा किया।
- राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें बरी किया।
- सीबीआई ने फैसले को चुनौती दी है।
- राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
- जमानत बांड की प्रक्रिया कानूनी औपचारिकता है।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की विवादास्पद आबकारी नीति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण राहत मिलने के बाद, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अदालत में 50-50 हजार रुपए के जमानत बांड प्रस्तुत किए। यह प्रक्रिया अदालत के आदेश के अनुसार संपन्न की गई।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में निर्णय सुनाते हुए कुल 23 आरोपियों को बरी किया था। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं होते, इसलिए सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है। इस निर्णय के बाद केजरीवाल और सिसोदिया सहित अन्य आरोपियों को बड़ा कानूनी लाभ मिला।
हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद भी एक कानूनी औपचारिकता के तहत जमानत बांड जमा करना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया में दोनों नेताओं ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके (जमानत बांड) अदालत में जमा किए।
यह ध्यान देने योग्य है कि केजरीवाल और सिसोदिया को कई महीनों तक जेल में रहने के बाद बरी किया गया था। कोर्ट से बरी होने के बाद आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया। अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने उनके खिलाफ साजिश रची थी।
सीबीआई ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
इसके बाद 11 मार्च को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक अर्जी दी, जिसमें उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पुनर्विचार याचिका को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की है।
केजरीवाल ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को पत्र लिखकर दिल्ली आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) मामले की सुनवाई किसी दूसरी बेंच को सौंपने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से हटाकर किसी अन्य बेंच को दिया जाए। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां ईडी की चल रही जांच को प्रभावित कर सकती हैं, जो प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चल रही है।