दिल्ली हाईकोर्ट में केजरीवाल और सिसोदिया के बरी होने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई की।
- केजरीवाल और सिसोदिया को बरी करने का मामला है।
- सीबीआई ने इसे बड़ा घोटाला बताया।
- साबित किए गए भ्रष्टाचार के सबूत मौजूद हैं।
- राजनीतिक आरोप और प्रत्यारोप जारी हैं।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 व्यक्तियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह राष्ट्रीय राजधानी के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच की गई है और साजिश के हर पहलू को साबित किया गया है। यह एक स्पष्ट भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें रिश्वत देने, लेने, स्वीकार करने और उपयोग करने के सबूत मौजूद हैं।
तुषार मेहता ने बताया कि हवाला के माध्यम से पैसे को कई किश्तों में ट्रांसफर किया गया। सभी महत्वपूर्ण गवाहों से मजिस्ट्रेट के सामने पूछताछ की गई और 164 के तहत उनके बयान दर्ज किए गए। मामले में ऐसे गवाह हैं जो स्पष्ट रूप से बताते हैं कि साजिश कैसे रची गई और रिश्वत कैसे दी गई। हमारे पास ईमेल और व्हाट्सएप चैट जैसे सबूत हैं। यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है।
उन्होंने बताया कि एएसजी ने ट्रायल कोर्ट में 10 दिनों तक बहस की। नतीजा जल्दी आया, लेकिन तेजी से न्याय का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि न्याय की विफलता हो। जब हम साजिश का आरोप लगाते हैं, तो हमें हर हिस्से को साबित करना होता है। ट्रायल में इसे साजिश बताने के लिए सभी हिस्सों को जोड़ना पड़ता है। साजिश कभी भी खुलेआम नहीं रची जाती। डिस्चार्ज ऑर्डर में भी इस पर भरोसा नहीं किया जाता।
तुषार मेहता ने कहा कि गवाहों के बयान और होटल के रिकॉर्ड मौजूद हैं और इनकी जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान की जानी चाहिए, न कि आरोप तय किए जाने के चरण में। उन्होंने कहा कि हमने साक्ष्य नष्ट करने के कई मामले दिखाए हैं, जिसमें 170 फोन नष्ट कर दिए गए थे, और जो साक्ष्य जुटाए गए थे, उन्हें नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन सभी नोटों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जो आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले थे। डिस्चार्ज ऑर्डर में अप्रूवर के 164 स्टेटमेंट को नज़रअंदाज़ किया गया, जबकि यह तय कानून है कि चार्ज के स्टेज पर अप्रूवर के स्टेटमेंट का काफी महत्व होता है।
आपको बता दें कि दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने 27 फरवरी को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके करीबी सहयोगी मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। इस मामले को शराब नीति घोटाला भी कहा जाता है।
केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी किया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने उनके खिलाफ साजिश रची थी।