क्या दिसंबर में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर नकारात्मक रही?
सारांश
Key Takeaways
- कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर -1.8 प्रतिशत रही।
- ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर -1.73 प्रतिशत रही।
- महंगाई दर में गिरावट से कमजोर वर्गों को राहत मिली है।
- नई सीपीआई श्रृंखला अधिक विश्वसनीय है।
- आरबीआई ने वित्त वर्ष 26 के लिए महंगाई दर का अनुमान 2 प्रतिशत रखा है।
नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिसंबर में कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एल) में सालाना आधार पर 0.04 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आरएल) में 0.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा बुधवार को प्रदान की गई।
मंत्रालय ने बताया कि इस अवधि में खाद्य महंगाई दर कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73 प्रतिशत रही है। यह मुख्यतः उत्पादन में वृद्धि के कारण खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी के कारण हुआ है।
महंगाई दर में यह कमी उन कमजोर वर्गों के लिए राहत का कारण बनी है, जो बढ़ती कीमतों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इससे उन्हें अधिक धन की उपलब्धता होती है, जिससे वे अधिक वस्तुएं खरीद सकते हैं और उनका जीवन स्तर उन्नत होता है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत श्रम ब्यूरो ने इस वर्ष जून से कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2019=100 निर्धारित किया है। ये सूचकांक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से एकत्रित आंकड़ों पर आधारित हैं।
नई सीपीआई – एएल एवं आरएल श्रृंखला (आधार: 2019=100) को पूर्व की 1986-87=100 श्रृंखला के स्थान पर लाया गया है।
संशोधित श्रृंखला ने सूचकांकों को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए दायरे और कवरेज को काफी हद तक बढ़ाया है और इसमें कई कार्यप्रणालीगत परिवर्तन शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा, खुदरा महंगाई दर दिसंबर में 1.33 प्रतिशत रही है, जो कि नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी।
वहीं, थोक कीमतों पर आधारित भारत की महंगाई दर दिसंबर में 0.83 प्रतिशत रही, जो कि नवंबर में -0.32 प्रतिशत थी। यह मुख्यतः विनिर्मित वस्तुओं (मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स) और खनिजों की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है।
आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 26 में खुदरा महंगाई दर लगभग 2 प्रतिशत रह सकती है। इसका कारण जीएसटी में कटौती और खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी है।