क्या सरकार ने 2025 में व्यापार को आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए?
Key Takeaways
- छोटी कंपनियों की नई परिभाषा से अधिक कंपनियां सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगी।
- विलय प्रक्रिया को सरल किया गया है।
- डायरेक्टर्स के लिए केवाईसी की प्रक्रिया हर तीन साल में होगी।
- निवेशकों के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है।
- सरकार ने 2026 में नए आरओसी ऑफिस शुरू करने की घोषणा की है।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण नियमों और तकनीकी सुधारों को लागू किया है, जिससे भारत में व्यापार करना काफी सरल हो गया है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) ने नियमों को सरल बनाने, कंपनियों की निगरानी सुधारने और कारोबारियों को राहत देने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्रालय ने छोटी कंपनियों की परिभाषा को संशोधित किया है। अब जिन कंपनियों की पूंजी 10 करोड़ रुपए तक और टर्नओवर 100 करोड़ रुपए तक है, उन्हें छोटी कंपनी माना जाएगा। इसके चलते अधिक कंपनियां सरकारी योजनाओं, सरल कर्ज और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।
सरकार ने कंपनियों के विलय (मर्जर) और बंटवारे (डिमर्जर) के नियमों में भी बदलाव किया है। सितंबर 2025 में कंपनी नियमों में संशोधन किया गया, जिससे कंपनियों के लिए फास्ट ट्रैक मर्जर की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
इसके अलावा, 31 दिसंबर 2025 को नियमों में बदलाव कर सरकारी कंपनियों को बंद करने की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है। अब ऐसी कंपनियों को बंद करने में कम कागजी कार्रवाई करनी होगी, जिससे समय की बचत होगी।
एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन यह किया गया है कि अब डायरेक्टर्स को हर साल केवाईसी भरने की आवश्यकता नहीं होगी। अब यह प्रक्रिया हर तीन साल में एक बार ही करनी होगी। यह नियम 31 मार्च 2026 से लागू होगा और इससे कंपनियों को बहुत राहत मिलेगी।
वहीं, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) को बेहतर बनाने के लिए 2025 में एक नया बिल लोकसभा में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य मामलों का त्वरित निपटारा करना और कर्ज देने वालों को अधिक धन वापस दिलाना है।
सितंबर 2025 तक आईबीसी के तहत 1,300 मामलों में समाधान हुआ और बैंकों तथा कर्ज देने वालों को लगभग 4 लाख करोड़ रुपए वापस मिले। यह राशि कंपनियों की अनुमानित कीमत से भी ज्यादा रही।
सरकार आईबीसी के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और निर्णय तेजी से लिए जाएंगे।
निवेशकों की सहायता के लिए निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) ने एक नया ऑनलाइन पोर्टल और कॉल सेंटर शुरू किया है। इससे शेयर और डिविडेंड से जुड़े दावे अब एक से दो दिन में निपटाए जा रहे हैं, जबकि पहले इसमें कई महीने लगते थे। इसके लॉन्च के बाद से अब तक 24,026 से अधिक दावों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे चालू वित्त वर्ष में कुल स्वीकृत दावों की संख्या 27,231 हो गई है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि 1 जनवरी, 2026 से देश में 3 नए रीजनल डायरेक्टरेट और 6 नए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी (आरओसी) ऑफिस स्थापित किए जाएंगे, जिससे कंपनियों को सेवाएं तीव्रता से और आसानी से मिलेंगी।
सरकार का कहना है कि ये सभी सुधार मिलकर भारत को दुनिया के सबसे आसान देशों में से एक बनाएंगे, जहां व्यापार करना सरल और सुरक्षित होगा।