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क्या गाजा संघर्ष के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं? आईएसएफ रिपोर्ट में आईएसआई की काबिलियत पर भी शक

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क्या गाजा संघर्ष के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं? आईएसएफ रिपोर्ट में आईएसआई की काबिलियत पर भी शक

सारांश

गाजा संघर्ष के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर इजरायली विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है। क्या पाकिस्तान की आईएसएफ में भागीदारी गाजा की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है? जानें इस रिपोर्ट के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की आईएसएफ में भागीदारी पर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट में हमास के प्रति पाकिस्तान के सकारात्मक रवैये का जिक्र है।
पाकिस्तान की आईएसआई पर आतंकी संगठनों का समर्थन करने का आरोप है।

वॉशिंगटन, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इजरायली सुरक्षा और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने एक नई रिपोर्ट जारी की है जिसमें गाजा में युद्ध के बाद पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) में पाकिस्तान की भागीदारी गाजा की स्थिरता और हमास को विघटित करने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि पाकिस्तान हमास का खुला समर्थक है।

इसमें उल्लेख किया गया है कि अमेरिका द्वारा प्रारंभ किए गए युद्ध के बाद गाजा में आईएसएफ में पाकिस्तान की संभावित भागीदारी हमास के सैन्य ढांचे को खत्म करने की कोशिशों को कमजोर कर सकती है।

न्यूयॉर्क के थिंक टैंक गेटस्टोन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में बताया गया है कि, “इजरायली अधिकारियों ने कहा है कि तीन देश युद्ध के बाद गाजा आईएसएफ में हिस्सा लेने के लिए वॉशिंगटन के आग्रह पर तैयार हैं। तीनों देशों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, हालांकि इंडोनेशिया उनमें से एक हो सकता है। पहले की रिपोर्टों में भी पाकिस्तान को आईएसएफ के वैकल्पिक सहयोगी के रूप में पहचाना गया था।”

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पाकिस्तान को सुरक्षा जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, तो यह मिशन की सफलता को खतरे में डाल सकता है। आशंका जताई गई है कि, “इसके अलावा, पाकिस्तान आधिकारिक रूप से इजरायल को मान्यता नहीं देता है, और उसने कभी भी हमास को आतंकवादी संगठन नहीं बताया है। हो सकता है कि उसे यह सुनिश्चित करने में दिलचस्पी हो कि हमास अपना ‘प्रतिरोध’ जारी रख सके—मतलब आतंकवाद पर लगाम न लगाए।”

पाकिस्तान ने अभी तक आईएसएफ में शामिल होने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और कहा है कि उसे कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है।

रिपोर्ट में आईएसआई को आतंकी संगठनों का शुभचिंतक बताने का प्रयास किया गया है। कहा गया है कि पाकिस्तान की सेना और उसकी मुख्य खुफिया एजेंसी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई), पर लंबे समय से इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया जाता रहा है।

इसमें कहा गया है कि दशकों तक, आईएसआई ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे पाकिस्तान-बेस्ड ग्रुप को बढ़ावा दिया, जिनकी सोच हमास से काफी मिलती-जुलती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे संबंध, युद्ध के बाद गाजा में हमास का मुकाबला करने की पाकिस्तान की क्षमता पर सवाल उठाते हैं।

रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, “7 अक्टूबर, 2023 के नरसंहार के बाद, हमास के प्रति पाकिस्तान का रवैया और भी सकारात्मक हो गया है। हमास के प्रतिनिधियों को पाकिस्तानी जमीन पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने, सार्वजनिक समारोहों में भाग लेने और पाकिस्तान-स्थित आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ बनाने की अनुमति दी गई है। इस तरह के व्यवहार सीधे तौर पर हमास को अलग-थलग करने की पश्चिमी कोशिशों को कमजोर करता है और यह सवाल उठाता है कि क्या यूएस को पाकिस्तान को ‘मेजर नॉन-नाटो सहयोगी’ के रूप में मान्यता देते रहना चाहिए।”

पाकिस्तान से जुड़े एक और बड़े जोखिम, विशेषकर इंटेलिजेंस लीक के बारे में बताते हुए, इसमें कहा गया है, “यदि गाजा में तैनात किया गया, तो पाकिस्तानी यूनिट्स सहयोग की आड़ में चुपचाप हमास या उसके क्षेत्रीय समर्थकों को संवेदनशील जानकारी दे सकती हैं। पहले की रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि आईएसआई पूरे दक्षिण एशिया में हमास की पहुंच को आसान बनाने में शामिल है, जिसमें जिहादी नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का दौरा करना भी शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे न केवल पाकिस्तान की भूमिका को संदर्भित करते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि कैसे क्षेत्रीय स्थिरता पर वैश्विक दृष्टिकोण प्रभावित होता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान दिया जाए और सभी देशों को जिम्मेदार ठहराया जाए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान की भूमिका पर क्या चिंताएँ हैं?
इजरायली सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की आईएसएफ में भागीदारी गाजा की स्थिरता को कमजोर कर सकती है।
क्या पाकिस्तान ने आईएसएफ में शामिल होने का निर्णय लिया है?
पाकिस्तान ने अभी तक आईएसएफ में शामिल होने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
आईएसआई पर क्या आरोप हैं?
रिपोर्ट में आईएसआई पर इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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