क्या देश के प्रधानमंत्री संविधान से नहीं, सभ्यतागत परंपरा से ‘हिंदू’ रहेंगे: सरमा?
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री पद के लिए कोई धार्मिक पहचान आवश्यक नहीं है।
- सरमा का बयान भाजपा के दृष्टिकोण को मजबूत करता है।
- प्रधानमंत्री मोदी का असम दौरा 18 जनवरी को है।
- काजीरंगा कॉरिडोर जैव विविधता की सुरक्षा में सहायक होगा।
- नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से रेल संपर्क में सुधार होगा।
गुवाहाटी, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को देश के शीर्ष नेतृत्व की धार्मिक पहचान पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भले ही संविधान में प्रधानमंत्री बनने के लिए कोई धार्मिक रोक नहीं है, परंतु देश की सभ्यतागत परंपरा यह सुनिश्चित करती है कि यह पद हिंदू के पास ही रहेगा।
मुख्यमंत्री सरमा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “भारत का प्रधानमंत्री कोई भी बन सकता है। संविधान में इस पर कोई रोक नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत मूलतः एक हिंदू सभ्यता है और उन्हें पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री हमेशा इसी सभ्यतागत ढांचे से उभरकर आएगा।
सरमा के ये बयान भारतीय जनता पार्टी के उस वैचारिक दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं, जिसमें भारत को केवल एक आधुनिक राजनीतिक राष्ट्र नहीं, बल्कि प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से निर्मित एक सभ्यतागत राज्य के रूप में देखा जाता है।
इस बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 जनवरी को प्रस्तावित असम दौरे को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कालीआबर में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखी जाएगी। लगभग 6,957 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) द्वारा लागू की जाएगी।
आधारशिला रखने के बाद परियोजना की प्रमुख विशेषताओं पर आधारित एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी। यह परियोजना एनएच-37 (नया एनएच-715) के कालीआबर–नुमालीगढ़ खंड को चार लेन में परिवर्तित करने का हिस्सा है।
इसमें लगभग 34.45 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड, वन्यजीव-अनुकूल कॉरिडोर शामिल है, साथ ही जखलाबांधा और बोकाखाट में बाइपास का निर्माण भी किया जाएगा। यह कॉरिडोर अदालत के निर्देशों और भारतीय वन्यजीव संस्थान की सिफारिशों के अनुसार डिजाइन किया गया है, ताकि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, की जैव विविधता की सुरक्षा के साथ-साथ मध्य और ऊपरी असम के बीच संपर्क बेहतर बनाया जा सके। परियोजना को 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, कार्यक्रम के दौरान दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों, डिब्रूगढ़ से गोमती नगर (लखनऊ) और कामाख्या से रोहतक, को वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाने की योजना है, जिससे असम से उत्तर भारत के लिए रेल संपर्क और मजबूत होगा।