ओडिशा के क्योंझर में ₹19,300 के लिए बहन का कंकाल बैंक लाया शख्स, बीजेडी सांसद ने वित्त मंत्री से माँगा सुधार
सारांश
Key Takeaways
- ओडिशा के क्योंझर के आदिवासी जीतू मुंडा ने मृत्यु प्रमाण पत्र न होने पर बहन का कंकाल बैंक ले जाकर ₹19,300 निकालने की कोशिश की।
- BJD सांसद मानस रंजन मंगराज ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ग्रामीण बैंकिंग में तत्काल सुधार की माँग की।
- माँगे गए सुधारों में छोटे जमा के लिए सरल प्रक्रिया, संवेदनशील फील्ड वेरिफिकेशन और बैंक अधिकारियों की जवाबदेही शामिल हैं।
- सांसद ने कहा कि जन धन योजना और DBT जैसी योजनाओं के बावजूद नीति और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
- वित्त मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ओडिशा के क्योंझर जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसमें एक गरीब आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा अपनी मृत बहन के बैंक खाते से मात्र ₹19,300 निकालने के लिए उसकी कब्र खोदकर कंकाल को बैंक तक ले गया। इस घटना ने ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर कर पूरे देश को झकझोर दिया है।
क्या है पूरा मामला
जीतू मुंडा एक अशिक्षित आदिवासी ग्रामीण हैं, जिनके पास न कानूनी जानकारी है और न ही पर्याप्त संसाधन। उनकी बहन की मृत्यु के बाद उनके बैंक खाते में ₹19,300 जमा थे। जब वे यह राशि निकालने बैंक पहुँचे, तो बैंक अधिकारियों ने उनसे मृत्यु प्रमाण पत्र की माँग की। यह दस्तावेज़ उनके पास उपलब्ध नहीं था। अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद मुंडा ने अपनी बहन की कब्र खोदकर उसके कंकाल को ही बैंक में प्रस्तुत कर दिया, ताकि मृत्यु का प्रमाण दिया जा सके।
बीजेडी सांसद की वित्त मंत्री को चिट्ठी
इस घटना के बाद बीजू जनता दल (BJD) के सांसद और संसदीय दल के नेता मानस रंजन मंगराज ने मंगलवार, 29 अप्रैल को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में तत्काल सुधार की माँग की। मंगराज ने अपने पत्र में लिखा, ''यह हृदयविदारक घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह गरीब और वंचित लोगों के प्रति बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी दर्शाती है।''
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जन धन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और डिजिटल बैंकिंग जैसी कई सुधार योजनाएँ शुरू की हैं, लेकिन यह घटना स्पष्ट करती है कि नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी एक बड़ी खाई मौजूद है।
किन सुधारों की माँग की गई
मंगराज ने वित्त मंत्री से अपील की कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने निम्नलिखित सुधारों की माँग रखी — छोटे जमा धन के लिए सरल प्रक्रिया, संवेदनशील फील्ड वेरिफिकेशन और बैंक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासियों, विधवाओं, बुजुर्गों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए प्रक्रियाओं को सुगम बनाने पर जोर दिया।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ग्रामीण भारत में बैंकिंग दस्तावेज़ीकरण की जटिलताओं ने किसी गरीब को असहाय स्थिति में पहुँचाया हो। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेश के दावे कर रही है। मंगराज ने इसे केवल बैंकिंग नहीं बल्कि एक मानवीय मुद्दा बताया और कहा, ''कोई भी नागरिक अपने ही परिवार की मेहनत की कमाई तक पहुँचने के लिए इस तरह की पीड़ा और मजबूरी का सामना न करे।''
आगे क्या होगा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले ने संसद में भी बहस छेड़ने की संभावना पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटे खातों के लिए वैकल्पिक सत्यापन प्रक्रिया लागू की जाए, तो ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है।