क्या मनसे ने कल्याण डोंबिवली नगर निकाय में शिंदे गुट को समर्थन दिया?

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क्या मनसे ने कल्याण डोंबिवली नगर निकाय में शिंदे गुट को समर्थन दिया?

सारांश

एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन देकर मनसे ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में राजनीतिक स्थिरता लाने का प्रयास किया है। जानें इसके पीछे की वजहें और स्थानीय राजनीति का असर।

Key Takeaways

  • मनसे का शिंदे गुट को समर्थन
  • स्थिरता का प्रयास
  • स्थानीय विकास की प्राथमिकता

कल्याण, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) चुनाव के परिणामों के बाद एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन देने का निर्णय लिया है।

इस निर्णय के पीछे की वजह बताते हुए, मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने कहा कि यह कदम राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और स्थानीय विकास को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है, न कि सत्ता की लड़ाई के लिए।

मनसे का शिंदे गुट को समर्थन देने का यह निर्णय शिवसेना-यूबीटी के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि दोनों पक्षों ने मराठी मानुष और मराठी पहचान के मुद्दों पर चुनाव लड़ा था।

राजू पाटिल ने कोंकण भवन में मीडिया को बताया, "संख्याओं का खेल और पाला बदलने का खतरा समाप्त नहीं हो रहा था। यह अराजकता आगामी समिति चुनावों में भी दिखाई दे सकती थी। शहर में स्थिरता लाने के लिए हमने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का निर्णय लिया।"

मनसे के निर्णय के पीछे की वजह बताते हुए पाटिल ने कहा कि पार्टी के पांच पार्षद अब सरकार के अंदर रहकर जनता की सेवा बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

पाटिल ने आगे कहा, "कल्याण-डोंबिवली के लोग दल-बदल की राजनीति से थक चुके हैं। हमारा निर्णय स्वार्थ के लिए नहीं है। सत्ता संरचना का हिस्सा बनकर हम विकास कार्यों की निगरानी कर पाएंगे। हम जनहित पर केंद्रित एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) के साथ आगे बढ़ रहे हैं।"

पाटिल ने यह भी बताया कि स्थानीय नेतृत्व ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे को क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा, "साहब ने हमें कहा था कि स्थानीय स्थिति के अनुसार जो निर्णय आवश्यक हो, वो लें। हमने उसी दिशा में कार्य किया।"

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कि मनसे ने कई क्षेत्रों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के साथ चुनाव लड़ा था, पाटिल ने कहा कि स्थानीय समीकरण राज्य स्तर के गठबंधनों से अलग होते हैं।

उन्होंने बताया कि चुनाव परिणामों के बाद कुछ पार्षद गायब हो गए थे, जिससे उनकी जीत की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि ऐसे गठबंधन "स्थानीय स्तर" पर होते हैं।

केडीएमसी चुनाव में खंडित जनादेश आया था। 122 सदस्यों वाले निगम में, शिवसेना ने 53 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने 51 सीटें प्राप्त कीं। बहुमत का आंकड़ा 62 है, जिससे चुनाव के बाद समर्थन की आवश्यकता बढ़ गई है।

Point of View

लेकिन मनसे का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि वे विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह कदम राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

मनसे ने शिंदे गुट को समर्थन क्यों दिया?
मनसे का यह निर्णय राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और स्थानीय विकास को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है।
इस समर्थन का क्या असर होगा?
यह कदम शिवसेना-यूबीटी के लिए एक बड़ा झटका है और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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