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हावड़ा: 500 साल पुरानी विरासत और टीएमसी का दबदबा

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हावड़ा: 500 साल पुरानी विरासत और टीएमसी का दबदबा

सारांश

हावड़ा, पश्चिम बंगाल की एक महत्वपूर्ण लोकसभा सीट है, जिसमें 500 साल पुराना इतिहास और टीएमसी का मजबूत राजनीतिक प्रभाव है। यहाँ की औद्योगिक महत्ता के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर भी इसे खास बनाती है। जानिए इसके विधानसभा क्षेत्रों और राजनीतिक अस्मिता के बारे में।

मुख्य बातें

हावड़ा लोकसभा सीट की साक्षरता दर 83.31 प्रतिशत है।
यह सीट 500 साल पुरानी विरासत का प्रतीक है।
टीएमसी का यहाँ मजबूत राजनीतिक प्रभाव है।
हावड़ा में 7 विधानसभा क्षेत्र हैं।
औद्योगिक महत्व के साथ, यहाँ कई समस्याएँ भी हैं।

हावड़ा, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हावड़ा लोकसभा सीट पश्चिम बंगाल की प्रमुख संसदीय सीटों में से एक मानी जाती है। यह हावड़ा जिले के अधिकतर शहरी क्षेत्रों को कवर करती है और कोलकाता महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है। इस क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा क्षेत्र हैं: 169-बल्ली, 170-हावड़ा उत्तर, 171-हावड़ा मध्य, 172-शिबपुर, 173-हावड़ा दक्षिण, 174-संकरैल और 175-पांचला। ये सभी क्षेत्र हावड़ा शहर और उसके आस-पास के औद्योगिक-शहरी इलाकों पर केंद्रित हैं।

पश्चिम बंगाल के प्रमुख जिलों में हावड़ा का नाम शामिल है, जिसका कुल क्षेत्रफल 1,467 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की जनसंख्या 48,50,029 है, जो इसे राज्य के सबसे घनी जनसंख्या वाले जिलों में से एक बनाती है। यहाँ की साक्षरता दर 83.31 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत से अधिक है। जिले में 14 विकास ब्लॉक, 157 गांव, एक नगर निगम (हावड़ा म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) और 26 पुलिस स्टेशन हैं। हावड़ा जिला अत्यधिक शहरीकृत है और कोलकाता के बाद दूसरा सबसे छोटा जिला है।

हावड़ा शहर हुगली नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है और इसे कोलकाता का जुड़वां शहर माना जाता है। यह कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीएमडीए) के क्षेत्र में आता है। हावड़ा कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट हब एवं प्रवेश द्वार है। यहाँ भारत का सबसे पुराना और व्यस्त रेलवे स्टेशन हावड़ा स्टेशन है, जो देश के सबसे बड़े रेलवे जंक्शनों में से एक है। शहर में हजारों साल पुरानी विरासत है, जो प्राचीन बंगाली साम्राज्य भुरशुत से संबंधित है।

अगर जिले के इतिहास की बात करें, तो यह लगभग 500 वर्ष पुराना है। वेनिस के यात्री सेसारे फेडेरिसी ने 1578 में अपनी डायरी में 'बुट्टोर' नामक स्थान का उल्लेख किया था, जो बड़े जहाजों के आने-जाने वाला बंदरगाह था। इसे आज के बटोर इलाके से जोड़ा जाता है। 1495 में बिप्रदास पिपिलई की बंगाली कविता 'मनसमंगल' में भी बटोर का उल्लेख किया गया है। 1713 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुग़ल बादशाह फर्रुखसियर से हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर पाँच गांवों (सालिका, हरिरा, कसुंडेह, रामकृष्णपुर और बत्तर) को बसाने की अनुमति मांगी थी। ये गांव आज हावड़ा शहर के प्रमुख हिस्से हैं।

हावड़ा लोकसभा सीट पर 2024 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दबदबा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी के प्रसून बनर्जी ने 6,26,493 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। भाजपा के डॉ. रथिन चक्रवर्ती को 4,57,051 वोट मिले, जबकि सीपीआई(एम) के सव्यसाची चटर्जी को 1,52,005 वोट प्राप्त हुए।

2019 लोकसभा चुनाव में भी प्रसून बनर्जी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने 5,76,711 वोट प्राप्त कर भाजपा के रंतिदेव सेनगुप्ता (4,73,016 वोट) को हराया। सीपीआई(एम) के सुमित्रो अधिकारी को 1,05,547 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुव्रा घोष को 32,107 वोट प्राप्त हुए।

वहीं, 2014 लोकसभा चुनाव में प्रसून बनर्जी ने 4,88,461 वोट लेकर सीपीएम के श्रीदीप भट्टाचार्य (2,91,505 वोट) को हराया था। उस समय टीएमसी को 43.4 प्रतिशत, सीपीएम को 25.9 प्रतिशत और भाजपा को 22.05 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस मात्र 5.62 प्रतिशत पर सिमट गई थी।

हावड़ा सीट का औद्योगिक महत्व है। यहाँ जूट मिलें, इंजीनियरिंग उद्योग, बंदरगाह और रेलवे सुविधाएं प्रमुख हैं। हालांकि, प्रदूषण, ट्रैफिक और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ भी मौजूद हैं। राजनीतिक रूप से यह टीएमसी का गढ़ है, जहाँ ममता बनर्जी की पार्टी मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

टीएमसी का दबदबा और औद्योगिक विकास की संभावनाएँ इसे विशेष बनाती हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हावड़ा की साक्षरता दर क्या है?
हावड़ा जिले की साक्षरता दर 83.31 प्रतिशत है।
हावड़ा में कितने विधानसभा क्षेत्र हैं?
हावड़ा लोकसभा क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा क्षेत्र हैं।
हावड़ा का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
हावड़ा का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है और इसे प्राचीन बंगाली साम्राज्य से जोड़ा जाता है।
हावड़ा के सबसे महत्वपूर्ण उद्योग कौन से हैं?
यहाँ जूट मिलें, इंजीनियरिंग उद्योग और रेलवे सुविधाएँ प्रमुख हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी का प्रदर्शन कैसा रहा?
2024 में टीएमसी के प्रसून बनर्जी ने 6,26,493 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की।
राष्ट्र प्रेस
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