भारत में 55 लाख से अधिक 5जी बेस स्टेशन, मोदी बोले — 'मोबाइल फोन बना सुशासन का हथियार'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत में अब 55 लाख से अधिक बेस स्टेशन 5जी नेटवर्क संचालित कर रहे हैं और मोबाइल इंटरनेट की स्पीड 2022 की तुलना में 10 गुना बढ़ चुकी है। मोदी ने इस मंच से यह भी रेखांकित किया कि मोबाइल फोन अब केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि सुशासन का एक प्रमुख उपकरण बन चुका है।
आईएमसी 2026: एक दशक की दूरसंचार यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र में आए तीव्र बदलावों की साक्षी रही है। उन्होंने स्मरण कराया कि 2022 में इसी मंच से 5जी सेवाओं की आधिकारिक शुरुआत की गई थी, और 2023 के संस्करण का केंद्रबिंदु '5जी रोलआउट से उपभोक्ताओं तक पहुँच विस्तार' था। इस वर्ष के सम्मेलन की थीम 'सीमाओं के बिना विस्तार' रखी गई है, जो भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे की विकास-गाथा को दर्शाती है।
मोदी ने कहा, 2022 में 5जी की शुरुआत से लेकर 2024 में अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ की मेज़बानी तक, आईएमसी ने भारत की दूरसंचार क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
5जी विस्तार: प्रमुख आँकड़े
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत में 55 लाख से अधिक 5जी बेस स्टेशन सक्रिय हैं। मोबाइल इंटरनेट की गति 2022 की तुलना में 10 गुना अधिक हो चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर देश 6जी की तैयारी कर रहे हैं — और भारत ने भी इस दिशा में अपनी महत्वाकांक्षाएँ स्पष्ट की हैं।
गौरतलब है कि 5.5 लाख बेस स्टेशन का आँकड़ा मोदी ने अपने संबोधन में उल्लिखित किया, जबकि उन्होंने बाद में 55 लाख का आँकड़ा भी दोहराया। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, यह संख्या देश के हर कोने में 5जी कवरेज सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
मोबाइल फोन: सुशासन का साधन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मोबाइल फोन सुशासन का एक उपकरण बन गया है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में दूरसंचार का महत्व अब केवल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और इंटरनेट गति तक सीमित नहीं रहा — यह नागरिकों को सरकारी सेवाओं से जोड़ने का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है।
मोदी ने याद दिलाया, 'एक दशक पहले, डिजिटल विभाजन एक चुनौती थी। नई तकनीक एक विशेषाधिकार बनती जा रही थी।' डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने मोबाइल फोन को डिजिटल पहुँच और सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार का केंद्र बनाने का प्रयास किया है — यह उनके अनुसार उस विभाजन को पाटने की रणनीति का हिस्सा है।
शिक्षा और डिजिटल सेवाओं पर असर
मोदी ने दीक्षा ऑनलाइन शिक्षा मंच का उल्लेख करते हुए बताया कि इस पर अब तक लगभग 500 करोड़ लर्निंग सेशन और 600 करोड़ लर्निंग मिनट दर्ज हो चुके हैं। सरकार का अगला लक्ष्य इस मंच के ज़रिये 25 करोड़ छात्रों को जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं को देश भर में सुलभ बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
आगे की राह: 6जी और डिजिटल भविष्य
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस 10वें संस्करण में 6जी की दिशा में भारत की तैयारियों पर भी व्यापक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि भारत की दूरसंचार कहानी को केवल तकनीकी मापदंडों से नहीं, बल्कि शासन और नागरिक सशक्तीकरण में इसकी भूमिका से आँका जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि 5जी की इस व्यापक पहुँच के बाद 6जी के लिए भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होगी।