8 अक्टूबर 2026
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IMC 2026: PM मोदी बोले — मोबाइल फोन गुड गवर्नेंस का टूल, DBT से ₹5 लाख करोड़ की बचत

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IMC 2026: PM मोदी बोले — मोबाइल फोन गुड गवर्नेंस का टूल, DBT से ₹5 लाख करोड़ की बचत

सारांश

IMC 2026 के मंच से मोदी ने दो बड़े दावे किए — DBT ने ₹5 लाख करोड़ की लीकेज रोकी और भारत में 50 करोड़ से ज़्यादा लोग गेमिंग से जुड़े हैं। यह सिर्फ टेलीकॉम इवेंट नहीं था; यह डिजिटल इंडिया की दस साल की उपलब्धियों का राजनीतिक लेखा-जोखा था।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में IMC 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया।
DBT के माध्यम से अब तक ₹50 लाख करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए; करीब ₹5 लाख करोड़ की लीकेज रुकी।
भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग सेक्टर से जुड़े हैं — मोदी के अनुसार।
मोदी ने डीपफेक को बड़ा खतरा बताते हुए वैश्विक सुरक्षा फ्रेमवर्क की माँग की।
भारत कंज्यूमर से क्रिएटर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है — उत्पाद डिज़ाइन, तकनीक और IP भारत में विकसित करने का लक्ष्य।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया और कहा कि मोबाइल फोन अब केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि गुड गवर्नेंस का एक निर्णायक उपकरण बन चुका है। उन्होंने बताया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए अब तक ₹50 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं, जिससे करीब ₹5 लाख करोड़ गलत हाथों में जाने से बचाए जा सके हैं।

मोबाइल और गवर्नेंस का नया रिश्ता

मोदी ने कहा कि बीते 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन भारत के डिजिटल इंडिया विजन की धुरी बन गया है। उन्होंने कहा, 'डिजिटल गवर्नेंस ने इन हालात को बदल दिया है। आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध हैं। सरकारी मदद अब सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।' उनके अनुसार, यदि पुरानी व्यवस्था बनी रहती, तो यह ₹5 लाख करोड़ 'लीकेज' के रूप में सिस्टम में खो जाता।

गौरतलब है कि एक दशक पहले तक भारत में डिजिटल विभाजन एक गंभीर चुनौती था — आधुनिक तकनीक उन्हीं की पहुंच में थी जिनके पास संसाधन थे। मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान ने इस असमानता को पाटने का प्रयास किया और मोबाइल फोन को इस बदलाव के केंद्र में लाया — जिसे उन्होंने 'टेक्नोलॉजी का डेमोक्रेटाइजेशन' कहा।

टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में दूरदराज के क्षेत्रों में टावर लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर का अभूतपूर्व विस्तार हुआ और डेटा की कीमतें तेज़ी से घटीं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं तक आम नागरिक की पहुँच बाधाहीन हो गई। उन्होंने कहा कि दूर-सुदूर गाँव के गरीब बच्चे भी अब क्वालिटी डिजिटल लर्निंग तक पहुँच पा रहे हैं।

इसके साथ ही मोबाइल इकोनॉमी ने टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में नए उपभोक्ता और रचनाकार वर्ग को जन्म दिया है। मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन ने लोगों का आना-जाना कम किया, लंबा इंतज़ार समाप्त किया और खर्च घटाया — यही 'इज़ ऑफ लिविंग' का असली अर्थ है।

गेमिंग सेक्टर: नई पीढ़ी का नया मंच

मोदी ने गेमिंग उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि एक अनुमान के अनुसार भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग सेक्टर से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि टियर 2 और टियर 3 शहरों का युवा अब केवल गेम खेलने तक सीमित नहीं है — वह ई-स्पोर्ट में प्रतिस्पर्धा कर रहा है, गेमिंग कंटेंट बना रहा है और नए गेमिंग व्यवसाय खड़े कर रहा है। उनके शब्दों में, 'भारत में मोबाइल फोन आज गेमिंग कंसोल भी है और क्रिएशन का स्टूडियो भी।'

सुरक्षा और वैश्विक फ्रेमवर्क की ज़रूरत

प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे टेलीकॉम और डिजिटल तकनीक का महत्व बढ़ रहा है, उससे जुड़े सुरक्षा ढाँचे को भी मज़बूत करना अनिवार्य है। उन्होंने डीपफेक को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए एक वैश्विक फ्रेमवर्क पर काम करना ज़रूरी है। फोन सुरक्षा और नेटवर्क सुरक्षा को उन्होंने सर्वोच्च प्राथमिकता करार दिया।

उपभोक्ता से निर्माता बनने की यात्रा

मोदी ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में कंज्यूमर से क्रिएटर बनने की यात्रा तय की है। अब देश उस लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है जहाँ उत्पाद का डिज़ाइन, उसकी तकनीक और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) — सब कुछ भारत में ही तैयार होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल हार्डवेयर निर्माताओं में शुमार हो चुका है। आने वाले वर्षों में IMC जैसे मंच भारत की वैश्विक टेक पहचान को और पुख्ता करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी स्वतंत्र सत्यापन की कोई सार्वजनिक पद्धति अभी तक सामने नहीं आई है — और यही इस दावे की सबसे बड़ी कमज़ोरी है। DBT ने निश्चित रूप से मध्यस्थों की भूमिका कम की है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि लाभार्थी सूचियों में अपात्रों का समावेश और 'लास्ट माइल' बैंकिंग की सीमाएँ अभी भी हल नहीं हुई हैं। गेमिंग में 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं का उल्लेख एक रोचक संकेत है, परंतु 'जुड़े होने' और 'आजीविका कमाने' के बीच का अंतर नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है — जिसे स्पष्ट नहीं किया गया। IMC जैसे मंच पर सरकार की उपलब्धियों का बखान स्वाभाविक है, लेकिन असली चुनौती अब टेलीकॉम रेगुलेशन, AI गवर्नेंस और डीपफेक पर ठोस कानूनी ढाँचे में है — जिनका IMC 2026 में केवल उल्लेख हुआ, रोडमैप नहीं मिला।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 क्या है और इसका 10वाँ संस्करण क्यों खास है?
इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन है। 2026 में इसका 10वाँ संस्करण आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन PM मोदी ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में किया — यह एक दशक की डिजिटल इंडिया यात्रा का प्रतीकात्मक पड़ाव माना जा रहा है।
DBT से ₹5 लाख करोड़ की लीकेज कैसे रुकी?
PM मोदी के अनुसार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए ₹50 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और करीब ₹5 लाख करोड़ गलत हाथों में जाने से बचाए जा सके। पुरानी व्यवस्था में यह राशि 'लीकेज' के रूप में खो जाती।
मोदी ने डीपफेक को लेकर क्या चेतावनी दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने IMC 2026 में कहा कि डीपफेक एक बड़ी वैश्विक चुनौती बन चुकी है और फोन व नेटवर्क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इससे निपटने के लिए एक ठोस वैश्विक सुरक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत में गेमिंग सेक्टर कितना बड़ा है?
PM मोदी ने IMC 2026 में बताया कि एक अनुमान के अनुसार भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग सेक्टर से जुड़े हैं। इनमें टियर 2 और टियर 3 शहरों के युवा भी शामिल हैं जो ई-स्पोर्ट, गेमिंग कंटेंट और गेमिंग व्यवसाय में सक्रिय हैं।
भारत टेलीकॉम में 'कंज्यूमर से क्रिएटर' कैसे बन रहा है?
PM मोदी ने कहा कि भारत ने मोबाइल हार्डवेयर निर्माण में बड़ी छलांग लगाई है और अब लक्ष्य है कि उत्पाद का डिज़ाइन, तकनीक और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) भी भारत में ही विकसित हो। यह परिवर्तन टेलीकॉम सेक्टर में सुधारों, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और 'मेड इन इंडिया' हार्डवेयर नीति का परिणाम है।
राष्ट्र प्रेस
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