PM मोदी ने GSMA बोर्ड से कहा: साइबर धोखाधड़ी के लिए चाहिए तकनीक-आधारित समाधान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (GSMA) के बोर्ड सदस्यों के साथ बैठक की और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की अनिवार्यता पर बल दिया। यह बैठक इंडिया मोबाइल कांग्रेस के आरंभ से ठीक पहले आयोजित की गई, जिसमें GSMA के बोर्ड सदस्यों के साथ-साथ भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण: मोदी का मुख्य संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी को समावेशी और सतत विकास का वाहक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग को डिजिटल क्रांति के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए, और इसके लिए तकनीक का लोकतंत्रीकरण अनिवार्य है। विशेष रूप से उन्होंने ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) के देशों के लिए डिजिटल सेवाओं को किफायती और सुलभ बनाने की आवश्यकता रेखांकित की।
मोदी ने बढ़ते डिजिटल विभाजन को एक गंभीर चुनौती बताया और कहा कि तकनीक को अंतिम छोर तक पहुँचाए बिना समावेशी विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में 5जी का विस्तार तेज़ी से हो रहा है और ग्रामीण कनेक्टिविटी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: वैश्विक मॉडल के रूप में भारत
प्रधानमंत्री ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) को विकासशील देशों के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि अनेक विश्व नेताओं के साथ DPI पर हुई चर्चाओं ने इसकी बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता को प्रमाणित किया है। उनके अनुसार, ऐसे प्लेटफॉर्म ग्लोबल साउथ के देशों के लिए डिजिटल विकास की नींव का काम कर सकते हैं।
गौरतलब है कि भारत का UPI और आधार-आधारित DPI मॉडल पहले से ही कई देशों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन चुका है, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसकी चर्चा तेज़ी से बढ़ रही है।
साइबर धोखाधड़ी और डीपफेक: तकनीकी समाधानों की माँग
साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती चुनौती पर मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस समस्या का समाधान भी प्रौद्योगिकी के ज़रिये ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उपयोगकर्ताओं को संभावित फर्जी कॉलों के प्रति सतर्क करने के लिए निरंतर जागरूकता संदेशों की व्यवस्था की जाए।
डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से निर्मित सामग्री के बढ़ते खतरे पर उन्होंने ज़ोर दिया कि ऐसे तंत्र विकसित किए जाएँ जिनसे उपयोगकर्ता किसी भी कंटेंट के स्रोत की तत्काल पहचान कर सकें। उभरती तकनीकों के लिए वैश्विक मानकों और साझा नियामक ढाँचे की ज़रूरत पर भी उन्होंने बल दिया।
GSMA बोर्ड की प्रतिक्रिया और भारत की तारीफ
GSMA बोर्ड के सदस्यों ने डिजिटल और मोबाइल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेता के रूप में उभरने की सराहना की। उन्होंने 4जी और 5जी के तीव्र विस्तार, DPI के विशाल विस्तार और दूरसंचार एवं मोबाइल विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को उल्लेखनीय उपलब्धि करार दिया।
बोर्ड सदस्यों ने भारत के निवेश-अनुकूल नीतिगत ढाँचे की विशेष प्रशंसा करते हुए 5जी, 6जी, AI, साइबर सुरक्षा, डिजिटल समावेश और सैटेलाइट कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते अवसरों की चर्चा की।
बैठक में उपस्थित प्रमुख नाम और आगे की राह
इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर, GSMA बोर्ड के सदस्य और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इंडिया मोबाइल कांग्रेस के मंच पर इन विषयों पर आगे नीतिगत संवाद और साझेदारियों की घोषणाएँ संभव हैं, जो भारत की डिजिटल नेतृत्व महत्वाकांक्षाओं को और मज़बूत कर सकती हैं।