भारत में अप्रैल 2026 में बिजली खपत 4% बढ़कर 153.99 BU, 25 अप्रैल को 256.11 GW का रिकॉर्ड
सारांश
Key Takeaways
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में अप्रैल 2026 में बिजली की कुल खपत 4.04 प्रतिशत बढ़कर 153.99 बिलियन यूनिट (BU) तक पहुँच गई, जो अप्रैल 2025 में 148.01 BU थी। महीने के पहले हिस्से में बेमौसम बारिश से तापमान नियंत्रित रहा, जिससे शुरुआती मांग धीमी रही — लेकिन अप्रैल के मध्य से तापमान में तेज़ उछाल ने खपत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया।
मुख्य घटनाक्रम: 25 अप्रैल को रिकॉर्ड मांग
25 अप्रैल 2026 को देश में बिजली की अधिकतम माँग 256.11 गीगावाट (GW) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। इसकी प्रमुख वजह देशभर में तेज़ गर्मी के कारण घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में एयर कंडीशनर व अन्य कूलिंग उपकरणों का बढ़ता उपयोग रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक ऊपर रहा, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में हीट स्ट्रेस की स्थिति बन गई।
सरकार का अनुमान: 270 GW तक पहुँच सकती है माँग
बिजली मंत्रालय का अनुमान है कि इस गर्मी के मौसम में अधिकतम बिजली माँग 270 गीगावाट तक पहुँच सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले साल गर्मियों में अधिकतम माँग 242.77 GW रही थी, जो जून 2025 में दर्ज हुई थी — और यह सरकार के तत्कालीन 277 GW के अनुमान से कम थी। गौरतलब है कि इस वर्ष IMD ने अप्रैल से जून 2026 के बीच कड़ी हीटवेव की चेतावनी जारी की है।
हीटवेव की चेतावनी और प्रभावित क्षेत्र
IMD के अनुसार, उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और पूर्वी तटीय राज्यों में सामान्य से अधिक हीटवेव के दिन देखे जा सकते हैं। कई स्थानों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने की आशंका है और उच्च आर्द्रता के कारण स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मई 2026 से बिजली की माँग और खपत में और तेज़ बढ़ोतरी देखी जाएगी।
सौर ऊर्जा की बढ़ती भूमिका
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक भारत में सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 150.26 GW से अधिक हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड संख्या में नए सौर प्रोजेक्ट जुड़ने से सोलर ऊर्जा देश का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला ऊर्जा स्रोत बन गई है। यह विस्तार बढ़ती माँग को पूरा करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
आने वाले महीनों में ग्रिड स्थिरता और पीक-आवर आपूर्ति प्रबंधन भारत के ऊर्जा नियोजकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।