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भारतीय शेयर बाजार ने "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" को पार किया, निवेश के नए अवसर उभर रहे हैं: रिपोर्ट

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भारतीय शेयर बाजार ने "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" को पार किया, निवेश के नए अवसर उभर रहे हैं: रिपोर्ट

सारांश

भारतीय शेयर बाजार ने "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" से बाहर निकलकर निवेशकों के लिए नए अवसर प्रस्तुत किए हैं। अध्ययन के अनुसार, ऐसे स्तरों से निवेश करने पर एक वर्ष में औसतन 17.5 प्रतिशत से अधिक रिटर्न मिलने की संभावना है। क्या यह सही समय है निवेश करने का?

मुख्य बातें

भारतीय शेयर बाजार ने "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" को पार किया।
71.3 प्रतिशत शेयर इस स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं।
स्मॉल-कैप शेयरों में गिरावट अधिक है।
लार्ज-कैप शेयरों में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है।
भारत का प्राइस-टू-अर्निंग प्रीमियम कम हुआ है।

मुंबई, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक नवीनतम अध्ययन के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार अब "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" से बाहर निकल चुका है और यह निवेशकों के लिए एक आकर्षक प्रवेश बिंदु के रूप में उभर रहा है। ऐतिहासिक डेटा के अनुसार, ऐसे स्तरों से निवेश करने पर एक वर्ष में औसतन 17.5 प्रतिशत से अधिक लाभ मिलने की संभावना होती है।

अध्ययन के अनुसार, जब निफ्टी 500 के 70 प्रतिशत से अधिक शेयर अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे व्यापार करने लगते हैं, तब बाजार "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" में पहुँच जाता है। यह संकेत करता है कि बाजार में डर छा गया है और मूलभूत तत्वों की अनदेखी की जा रही है।

वर्तमान में लगभग 71.3 प्रतिशत शेयर इस स्थिति में व्यापार कर रहे हैं, जो यह प्रदर्शित करता है कि बाजार "कैपिटुलेशन जोन" में था और अब रिकवरी के संकेत दिखा रहा है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि हाल की गिरावट के दौरान विभिन्न मार्केट कैप सेगमेंट में जोखिम की भावना में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जहाँ बड़े शेयरों की तुलना में 1,000 बेसिस पॉइंट से अधिक की गिरावट देखी गई। इनमें से लगभग 61 प्रतिशत स्मॉल-कैप शेयरों में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है और इनका औसत रिटर्न -17 प्रतिशत रहा है। वहीं, मिड-कैप सेगमेंट में लगभग 51 प्रतिशत शेयर 10 प्रतिशत से अधिक टूटे हैं।

इसके विपरीत, लार्ज-कैप शेयर अपेक्षाकृत मजबूत बने रहे, जहाँ केवल 32 प्रतिशत शेयरों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि बड़े और मजबूत मूलभूत वाले शेयरों में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है।

अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान रिकवरी का एक महत्वपूर्ण संकेत ऊर्जा कीमतों में सामान्यता है। ऐतिहासिक रूप से कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर होने में औसतन 30 सप्ताह का समय लगता है, लेकिन हाल की घटनाओं में यह समय महीनों से घटकर कुछ हफ्तों में सिमट गया है, क्योंकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान सप्लाई शॉक केवल 9 सप्ताह तक ही रहा। यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार अब पहले की तुलना में तेजी से झटकों को समाहित कर रहा है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि उभरते बाजारों (ईएम) की तुलना में भारत का प्राइस-टू-अर्निंग (पीई) प्रीमियम काफी कम हो गया है। यह 2022 में 1.57 गुना के उच्च स्तर से घटकर अब 0.38 गुना पर आ गया है, जिससे भारतीय बाजार की वैल्युएशन अब अधिक आकर्षक नजर आ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर जब ऐतिहासिक आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय शेयर बाजार में "एक्सट्रीम स्ट्रेस जोन" क्या होता है?
यह स्थिति तब होती है जब निफ्टी 500 के 70 प्रतिशत से अधिक शेयर अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे व्यापार करते हैं।
क्या भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना सुरक्षित है?
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बाजार अब रिकवरी के संकेत दिखा रहा है, जिससे निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं।
स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप शेयरों में क्या अंतर है?
स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, जबकि लार्ज-कैप शेयरों में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है।
क्या ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से शेयर बाजार प्रभावित होता है?
हाँ, ऊर्जा कीमतों में सामान्यता से बाजार में स्थिरता आ सकती है, जिससे निवेश के अवसर बढ़ते हैं।
भारतीय बाजार का प्राइस-टू-अर्निंग प्रीमियम क्या है?
यह 2022 में 1.57 गुना से घटकर अब 0.38 गुना पर आ गया है, जिससे बाजार की वैल्युएशन अधिक आकर्षक हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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