क्या इसरो 55 से ज्यादा क्षेत्रों में सक्रिय होकर यूपी का हर तरह से सहयोग करने को तैयार है?

सारांश
Key Takeaways
- इसरो जलवायु डेटा के लिए सटीक पूर्वानुमान में मदद कर सकता है।
- उत्तर प्रदेश में कृषि में सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया जा सकता है।
- 8700 ट्रेनें रियल-टाइम में इसरो से जुड़ी हैं।
- इसरो भविष्य में मानव और मानव रहित मिशनों की योजना बना रहा है।
- राज्य सरकारें इसरो से सहयोग के लिए पहल कर सकती हैं।
लखनऊ, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) विभिन्न क्षेत्रों में राज्यों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मौसम पूर्वानुमान, कृषि, आपदा प्रबंधन और तकनीकी नवाचारों पर जोर दे रहा है। उत्तर प्रदेश में जलवायु डेटा, बिजली गिरने की सटीक भविष्यवाणी, और खेती में उपग्रह आधारित सहायता जैसे क्षेत्र संभावनाओं से भरे हुए हैं। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में इन मुद्दों पर चर्चा की। यहाँ से मुख्य अंश प्रस्तुत हैं।
प्रश्न: क्या उत्तर प्रदेश में जलवायु डेटा से जुड़ी कोई योजना है?
जवाब: देखिए, इसरो मौसम की भविष्यवाणी के लिए कई योजनाएँ बना रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का मुख्य कार्य है मौसम का अनुमान लगाना, लेकिन इसरो अपने सैटेलाइट डेटा के माध्यम से मौसम में बदलाव का अध्ययन करता है, जिससे भविष्यवाणी को और सटीक बनाया जा सके। वर्तमान में हमारे पास कुछ सैटेलाइट हैं, जिन्हें हम और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि मौसम की भविष्यवाणी सटीक होगी, तो बदलावों का पूर्वानुमान लगाना सरल हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि बिजली गिरने से लोगों की जान और धन का नुकसान होता है। इसरो इस दिशा में राज्य सरकार के साथ काम कर सकता है ताकि बिजली गिरने की सटीक भविष्यवाणी की जा सके। इसके अलावा, इसरो 55 से अधिक क्षेत्रों में कार्यरत है, जैसे कि खेती, मौसम, फसल की पैदावार, खाद्य सुरक्षा, पानी की सुरक्षा, टेली-एजुकेशन, और टेली-मेडिसिन। हम सभी राज्य सरकारों से उनकी आवश्यकताओं के बारे में बातचीत कर रहे हैं और उसी के अनुरूप मदद करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रश्न: क्या उत्तर प्रदेश सरकार के साथ कृषि के क्षेत्र में कोई सहयोग संभव है?
जवाब: मैं कृषि का वैज्ञानिक नहीं हूँ, लेकिन इसरो कृषि में काफी मदद कर सकता है। हमारे सैटेलाइट डेटा से फसल की पैदावार का अनुमान लगाया जा सकता है और बीमा से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई किसान कहता है कि उसकी फसल खराब हो गई है, तो उसकी जांच के लिए खेत पर जाना पड़ता है, जिसमें समय लग सकता है। लेकिन सैटेलाइट डेटा से तुरंत पता चल सकता है कि नुकसान कितना हुआ है। इसके अतिरिक्त, इसरो खाद्य सुरक्षा, पानी की सुरक्षा, टेलीकम्युनिकेशन, टेलीविजन, टेली-एजुकेशन, मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी, और ट्रेनों को जोड़ने जैसे कई कार्य कर रहा है। वर्तमान में 8700 ट्रेनें रियल-टाइम में जुड़ी हुई हैं। साथ ही, समुद्र में नावों को जोड़ने का कार्य भी चल रहा है। भारत के पास 7500 एकड़ समुद्री तट है, और हमारी जिम्मेदारी है कि तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हम एक नेविगेशन ऐप विकसित कर रहे हैं, जिससे मछुआरे समुद्र में अपनी सही स्थिति जान सकें और गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार न करें। यह ऐप वर्तमान में छोटे इलाके में कार्य कर रहा है और जल्द ही पूरे देश में विस्तारित होगा।
प्रश्न: इसरो और किन-किन क्षेत्रों में मदद कर सकता है?
जवाब: इसरो रियल-टाइम में ट्रेनों की निगरानी कर रहा है, जिससे यात्रियों को बहुत लाभ हो रहा है। वर्तमान में 8700 ट्रेनें इससे जुड़ी हैं। इसके अलावा, गाड़ियों की निगरानी और वाहनों को ट्रैक करने में भी सैटेलाइट की मदद ली जा सकती है। पिछले चार महीनों में इसरो ने हर राज्य के अधिकारियों और विभागों जैसे कि खेती, पानी, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा, खनन और कौशल विकास से बातचीत की है। इन चर्चाओं के आधार पर इसरो 10-15 वर्षों का एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार करेगा, जिसे प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।
प्रश्न: यदि कोई राज्य मदद चाहता है, तो इसरो क्या करेगा?
जवाब: आजकल अंतरिक्ष क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। यदि कोई राज्य सरकार पहल करती है और अपनी आवश्यकताएँ बताती है, तो इसरो उसकी मदद करने का पूरा प्रयास करेगा।
प्रश्न: इसरो के भविष्य के प्रोजेक्ट्स क्या हैं?
जवाब: इसरो कई महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। हाल ही में हमने एक विमान का परीक्षण किया। हम तीन मानव रहित मिशनों की तैयारी कर रहे हैं। पहला मिशन इस साल दिसंबर में होगा, जिसमें वायुमित्र उड़ान भरेगा। अगले साल दो और मानव रहित मिशन होंगे। इसके बाद 2027 की पहली तिमाही में एक मानव मिशन होगा।