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क्या प्रियांक खड़गे और सिद्धारमैया लोगों में भ्रम फैला रहे हैं? : जगदीश शेट्टार

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क्या प्रियांक खड़गे और सिद्धारमैया लोगों में भ्रम फैला रहे हैं? : जगदीश शेट्टार

सारांश

भाजपा सांसद जगदीश शेट्टार ने कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे और सिद्धारमैया पर आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं। जानें इस विवाद का पूरा सच और क्या है आरएसएस का असली मुद्दा।

मुख्य बातें

जगदीश शेट्टार ने प्रियांक खड़गे और सिद्धारमैया पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया।
कर्नाटक में विजयादशमी के जुलूसों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
कांग्रेस नेताओं की आरएसएस के प्रति चिंता बढ़ी।
सोशल मीडिया पर इस विवाद का बड़ा असर देखा जा रहा है।

धारवाड़, 19 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के सांसद जगदीश शेट्टार ने कांग्रेस के नेता और कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रियांक खड़गे और सिद्धारमैया बिना वजह से लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं।

शेट्टार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रियांक खड़गे ने दो पत्र भेजे थे, लेकिन उनका कोई असर नहीं हुआ क्योंकि वे पत्र संविधान के खिलाफ थे। इसके साथ ही, सिद्धारमैया ने भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। आरएसएस पर प्रतिबंध लगाना संविधान के विपरीत है।

उन्होंने बताया कि चित्तपुर में आरएसएस के जुलूस को रोकने की राज्य सरकार की कोशिशें विफल रही, क्योंकि उच्च न्यायालय ने जुलूस की अनुमति दे दी और जिला प्रशासन को सहयोग का आदेश दिया।

शेट्टार ने कहा कि आरएसएस की गतिविधियां बढ़ रही हैं। कांग्रेस नेता इसकी बढ़ती लोकप्रियता को सहन नहीं कर पा रहे हैं और इसे प्रतिबंधित करने का सपना देख रहे हैं। राज्य भर में विजयादशमी के जुलूसों में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता केवल अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

वास्तव में, कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक पत्र भेजकर राज्य के सरकारी परिसरों में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की है। यह पत्र 4 अक्टूबर को लिखा गया था, जिसे अब सीएम की मीडिया टीम ने सार्वजनिक किया है।

प्रियांक खड़गे ने पत्र में लिखा, "जब समाज में नफरत फैलाने वाली विभाजनकारी ताकतें सिर उठाती हैं तो हमारे संविधान के मूल सिद्धांत (एकता, समानता और अखंडता) हमें उन्हें रोकने का अधिकार देते हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की शाखाएं सरकारी और अर्ध-सरकारी स्कूलों, सार्वजनिक मैदानों, मंदिरों, पार्कों और पुरातत्व विभाग के स्थलों में सक्रिय हैं। यहां बिना पुलिस की अनुमति के आक्रामक प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिससे बच्चों और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने आगे लिखा, "देश के बच्चों, युवाओं और समाज के मानसिक स्वास्थ्य और विकास के हित में आरएसएस की सभी गतिविधियों को सरकारी परिसरों में प्रतिबंधित किया जाए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस प्रकार के आरोप और बयान हमेशा से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। यह आवश्यक है कि सभी पक्ष अपनी बात रखें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करें।
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