क्या जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी का इंतजार जारी रहेगा, चिल्लई कलां में 'सूखी सर्दी'?

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क्या जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी का इंतजार जारी रहेगा, चिल्लई कलां में 'सूखी सर्दी'?

सारांश

क्या जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी का इंतजार खत्म होगा? चिल्लई कलां के दौरान सूखी सर्दी ने लोगों को चिंतित कर दिया है। जानें इस मौसम की बर्फबारी का क्या होगा असर।

Key Takeaways

  • जम्मू-कश्मीर में न्यूनतम तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे है।
  • चिल्लई कलां में अब तक कोई बड़ी बर्फबारी नहीं हुई है।
  • सर्दियों की बर्फबारी की कमी से सिंचाई और पीने के पानी पर असर पड़ेगा।
  • मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक शुष्क मौसम की भविष्यवाणी की है।
  • स्थानीय निवासियों के लिए यह चिंता का विषय है।

श्रीनगर, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर में सर्दियों का मौसम और भी अधिक ठंडा हो गया है, जिसके चलते रविवार को घाटी में न्यूनतम तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से कई डिग्री नीचे चला गया।

शनिवार रात को आसमान के आंशिक रूप से साफ होने के कारण पूरी घाटी में रात का तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे रहा, जबकि मैदानी इलाकों में बर्फबारी की कोई संभावना नहीं थी। इन क्षेत्रों में फिर से ठंडा और सूखा मौसम बना रहा।

श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 3.2 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में माइनस 6.5 डिग्री सेल्सियस और पहलगाम में माइनस 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 7 डिग्री सेल्सियस, बटोटे में 1.9 डिग्री सेल्सियस, बनिहाल में माइनस 0.9 डिग्री सेल्सियस और भद्रवाह में माइनस 1.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी की कमी और घाटी के मैदानी इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी न होना एक गंभीर चिंता का विषय बन रहा है, खासकर जब 21 दिसंबर को शुरू हुआ 'चिल्लई कलां' नामक 40 दिन का कड़ाके का ठंड का समय अब तक कोई महत्वपूर्ण बर्फबारी नहीं दे सका है।

चिल्लई कलां 30 जनवरी को समाप्त होगा। मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक जम्मू-कश्मीर में सामान्यतः शुष्क मौसम का अनुमान लगाया है। यदि चिल्लई कलां के दौरान भारी बर्फबारी नहीं होती है, तो गर्मियों में जम्मू और कश्मीर को कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

भारी सर्दियों की बर्फबारी की कमी से केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि पीने के पानी की आवश्यकताएं भी बुरी तरह प्रभावित होंगी। जम्मू और कश्मीर की सभी नदियाँ, झरने, कुएँ और झीलें पहाड़ों में स्थित बारहमासी जल भंडारों से पोषित होती हैं। ये भंडार सर्दियों के महीनों में भारी बर्फबारी से भरते हैं।

Point of View

बल्कि पीने के पानी की उपलब्धता भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यह समय सरकार और स्थानीय प्राधिकरण के लिए एक गंभीर विचार का विषय बन गया है।
NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या जम्मू-कश्मीर में इस साल बर्फबारी होगी?
इस मौसम में बर्फबारी की कोई ठोस संभावना नहीं दिख रही है।
चिल्लई कलां कब तक चलेगा?
चिल्लई कलां 30 जनवरी को समाप्त होगा।
क्या बर्फबारी की कमी से पानी की कमी होगी?
हां, भारी सर्दियों की बर्फबारी की कमी से पीने के पानी की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
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