क्या केंद्र सरकार के मंत्री जनता के टैक्स का दुरुपयोग कर रहे हैं?
सारांश
Key Takeaways
- जनता के टैक्स का दुरुपयोग आरोपित किया गया है।
- महंगाई और बेरोजगारी की समस्या गंभीर है।
- युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।
- सरकार को जनता की समस्याओं को सुनना चाहिए।
- जनता को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी।
लखनऊ, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता अजय चौटाला के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने केंद्र सरकार पर भयंकर आक्रमण किया है। उनका कहना है कि आज देश की जनता कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय जनता के पैसों का दुरुपयोग कर रही है।
रविदास मेहरोत्रा ने बताया कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और भूख ने आम लोगों की जिंदगी को कठिन बना दिया है। रोजमर्रा की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और गरीब परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनता से टैक्स के रूप में वसूला गया पैसा केंद्र सरकार के मंत्री अपनी व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं पर खर्च कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सपा विधायक ने कहा कि इस स्थिति में देश के युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। युवा वर्ग बेहद परेशान है। उसे न रोजगार मिल रहा है, न भविष्य सुरक्षित दिख रहा है। चारों ओर गरीबी और भूख का साम्राज्य है। ऐसे में युवाओं का गुस्सा बढ़ना स्वाभाविक है।
रविदास मेहरोत्रा ने पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में जनता और युवाओं का आक्रोश चरम पर पहुंचा, तो वहां बड़े जनआंदोलनों के जरिए सत्ता में बैठे लोगों को हटाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब भारत में भी कुछ ऐसी ही परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो जनता और युवा वर्ग को अपने अधिकारों और न्याय के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा। जब तक जनता आवाज नहीं उठाएगी, तब तक न तो युवाओं को उनका हक मिलेगा और न ही देश में न्याय स्थापित होगा।
सपा विधायक ने दोहराया कि सरकार को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि जनता के पैसों से वसूले गए टैक्स का दुरुपयोग हो रहा है और यही कारण है कि लोगों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।