क्या झारखंड में पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने पेसा नियमावली को आदिवासी समाज से धोखा बताया?
सारांश
Key Takeaways
- पेसा नियमावली का उद्देश्य आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा है।
- भाजपा और कांग्रेस के बीच गंभीर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप।
- चंपई सोरेन के अनुसार नियमावली ने पारंपरिक अधिकारों को कमजोर किया है।
- कांग्रेस का तर्क है कि यह एक ऐतिहासिक कदम है।
- आदिवासी समुदाय की स्थिति को सुधारने की आवश्यकता है।
रांची, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में २५ वर्षों के बाद लागू की गई पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया एक्ट) नियमावली को लेकर राजनीतिक बयानों का दौर तेज हो गया है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इसे आदिवासी समुदाय के साथ धोखा बताया है, जबकि कांग्रेस ने इसे आदिवासी स्वशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम करार दिया है। दोनों दलों के नेताओं ने मंगलवार को अलग-अलग संवाददाता सम्मेलनों में एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा के चंपई सोरेन ने कहा कि पेसा कानून का लक्ष्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और स्वशासन की रक्षा करना था, लेकिन राज्य सरकार ने नियमावली बनाते समय इसकी मूल भावना को कमजोर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमावली के पहले पृष्ठ से ही रूढ़िवादी प्रथाओं को हटाकर आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था और अधिकारों पर चोट पहुंचाई गई है।
सोरेन ने कहा कि सरकार ने ग्राम सभा को सशक्त बनाने के बजाय उसे कमजोर कर दिया है। सीएनटी से जुड़े मामलों में जहां पहले ग्राम सभा की निर्णायक भूमिका होती थी, वहीं अब यह अधिकार उपायुक्त को सौंप दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जनसंख्या लगातार घट रही है, ऐसे में पेसा नियमावली में पुस्तैनी भूमि और पारंपरिक व्यवस्था को गौण करना गंभीर चिंता का विषय है। चंपई सोरेन ने यह आशंका जताई कि इसके परिणामस्वरूप सीएनटी और एसपीटी जैसे सुरक्षा कानून भी निष्प्रभावी हो सकते हैं।
वहीं, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पेसा कानून केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन की आत्मा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक शासन किया, उनके कार्यकाल में न तो आदिवासियों की भूमि सुरक्षित रही, न जंगल और न ही उनके अधिकार। आज वही लोग पेसा को लेकर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पेसा नियमावली बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और जनता, सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों से व्यापक विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना पेसा को ठीक से पढ़े और समझे, भाजपा नेता भ्रामक और भावनात्मक बातें फैलाकर आदिवासी समाज को आपस में बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दौरान लाखों एकड़ आदिवासी भूमि को लैंड बैंक में डालकर पूंजीपतियों को सौंपने की साजिश रची गई थी।