क्या झारखंड में सुरक्षाबलों ने सारंडा में मुठभेड़ के दौरान एक करोड़ के इनामी पतिराम समेत 15 नक्सली ढेर किए?
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षाबलों ने 15 नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर किया।
- पतिराम मांझी एक करोड़ का इनामी माओवादी है।
- चाईबासा में सुरक्षाबलों की सफल कार्रवाई।
- सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी।
- नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई है।
चाईबासा, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जनपद के नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। गुरुवार को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान एक करोड़ के इनामी माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा सहित 15 नक्सलियों को ढेर कर दिया। झारखंड पुलिस के आईजी अभियान माइकल राज ने अनल दा समेत कई नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की है।
माओवादी पतिराम मांझी का मूल निवास झारखंड के गिरिडीह जिले में है। वह पिछले दो दशकों से नक्सली गतिविधियों में शामिल रहा है और उसे संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक माना जाता था। उसका नेटवर्क गिरिडीह से लेकर बोकारो, हजारीबाग, खूंटी, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम तक फैला हुआ था। सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ को मजबूत करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उसके खिलाफ सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, लेवी वसूली और ठेकेदारों को धमकाने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मुठभेड़ चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र में कुंभडीह गांव के निकट शुरू हुई, जब सुरक्षाबलों ने गुप्त सूचना के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया। अभियान के दौरान पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रणनीतिक ढंग से नक्सलियों को घेर लिया। कई घंटों तक चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को निर्णायक बढ़त मिली।
कोल्हान प्रमंडल के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने बताया कि अभियान अभी भी जारी है और पूरी तरह समाप्त होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। झारखंड पुलिस के आईजी अभियान माइकल राज ने बताया कि सुबह से ही सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है और नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ है। मुठभेड़ स्थल से कई नक्सलियों के शव, अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने चाईबासा में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई थी। इस बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिले थे कि सुरक्षा बल एक बड़े और निर्णायक ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इसी रणनीति के तहत झारखंड और ओडिशा से बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती सारंडा क्षेत्र में की गई थी।
सारंडा जंगल को लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। हाल के महीनों में चाईबासा, कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आई है। जून 2025 में टोंटो और गोइलकेरा इलाके में हुई मुठभेड़ में चार नक्सली मारे गए थे। वर्ष 2026 में नक्सलियों के साथ यह पहली बड़ी मुठभेड़ मानी जा रही है, जिसे सुरक्षा बलों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।