21 अक्टूबर 2026
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पुलिस स्मृति दिवस पर J&K उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहीद पुलिसकर्मियों को अर्पित की श्रद्धांजलि

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पुलिस स्मृति दिवस पर J&K उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहीद पुलिसकर्मियों को अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

पुलिस स्मृति दिवस पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शहीद पुलिसकर्मियों को नमन किया और एक सुरक्षित-समृद्ध जम्मू-कश्मीर के निर्माण का आह्वान किया। यह दिवस 1959 में अक्साई चिन के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी हमले में शहीद 10 भारतीय पुलिसकर्मियों की याद में हर वर्ष मनाया जाता है।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद पुलिसकर्मियों को एक्स पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य परेड श्रीनगर के जीवान स्थित सशस्त्र पुलिस मुख्यालय में आयोजित हुई; अध्यक्षता डीजीपी नलिन प्रभात ने की।
जम्मू में गुलशन ग्राउंड, गांधी नगर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीपी तेजिंदर सिंह ने की।
21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के अक्साई चिन में चीनी सैनिकों के हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में 30 फुट ऊँची ग्रेनाइट प्रतिमा और 'वॉल ऑफ वेलर' पर हजारों शहीदों के नाम अंकित हैं।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 21 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर उन सभी पुलिसकर्मियों के बलिदान, कर्तव्यनिष्ठा और वीरता को नमन किया, जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने सामाजिक मीडिया मंच एक्स पर अपना संदेश साझा करते हुए शहीदों के परिजनों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और एक सुरक्षित, समृद्ध जम्मू-कश्मीर के निर्माण का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।

उपराज्यपाल का संदेश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा, 'पुलिस स्मृति दिवस पर मैं उन बहादुर पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। मैं उनके साहस, कर्तव्य और त्याग को नमन करता हूं तथा उनके परिवारों के प्रति अपना सम्मान और एकजुटता व्यक्त करता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारे शहीदों की वीरता हमें शांति, एकता और सुरक्षा को और मजबूत करने की प्रेरणा देती है। आइए, हम सभी एक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध जम्मू-कश्मीर के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लेकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दें।'

श्रीनगर और जम्मू में मुख्य समारोह

मुख्य परेड श्रीनगर के जीवान स्थित सशस्त्र पुलिस मुख्यालय में आयोजित हुई, जहाँ पुलिस शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया गया। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने मुख्य समारोह की अध्यक्षता की और परेड की सलामी ली।

जम्मू में मुख्य कार्यक्रम गांधी नगर स्थित गुलशन ग्राउंड में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) तेजिंदर सिंह ने की। दोनों कार्यक्रमों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, शहीदों के परिजन और पुलिसकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

पुलिस स्मृति दिवस का ऐतिहासिक महत्व

21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के अक्साई चिन क्षेत्र के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों ने भारतीय पुलिस की एक गश्ती टीम पर घात लगाकर हमला किया था। इस असमान संघर्ष में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे, जबकि कई अन्य घायल हुए या बंदी बना लिए गए थे।

गौरतलब है कि जनवरी 1960 में पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में 21 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से पुलिस स्मृति दिवस (पुलिस शहीद दिवस) घोषित किया गया, ताकि उन शहीद पुलिसकर्मियों और देश की सेवा में जान गँवाने वाले सभी पुलिसकर्मियों को स्मरण किया जा सके। यह दिवस तब से हर वर्ष राष्ट्रव्यापी श्रद्धांजलि के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थापित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में 30 फुट ऊँची ग्रेनाइट की केंद्रीय प्रतिमा और 'वॉल ऑफ वेलर' बनाई गई है, जिस पर स्वतंत्रता के बाद से शहीद हुए हजारों पुलिसकर्मियों के नाम अंकित हैं। यह स्मारक देशभर में बलिदान की अटूट परंपरा का प्रतीक है।

उपराज्यपाल सिन्हा का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की भूमिका और उनके बलिदान को लेकर राष्ट्रीय चर्चा निरंतर जारी है। शहीदों की स्मृति को जीवित रखना और उनके परिजनों के साथ एकजुटता दिखाना राज्य प्रशासन की प्राथमिकता रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे सेना नहीं बल्कि नागरिक पुलिस के जवान थे — यह तथ्य उनके बलिदान को और असाधारण बनाता है। जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में, जहाँ सुरक्षा बल निरंतर दबाव में काम करते हैं, ऐसे आयोजन केवल स्मृति नहीं बल्कि मनोबल-निर्माण का भी माध्यम हैं। यह देखना होगा कि शहीद परिवारों के कल्याण और पुनर्वास के ठोस कदम इन भावनात्मक संबोधनों के साथ कदमताल कर पाते हैं या नहीं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के अक्साई चिन में चीनी सैनिकों के हमले में शहीद 10 भारतीय पुलिसकर्मियों की याद में हर वर्ष मनाया जाता है। जनवरी 1960 में पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में इस दिन को आधिकारिक रूप से पुलिस शहीद दिवस घोषित किया गया था।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पुलिस स्मृति दिवस पर क्या कहा?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर संदेश में कहा कि वे शहीद पुलिसकर्मियों के साहस, कर्तव्य और त्याग को नमन करते हैं और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व एकजुटता व्यक्त करते हैं। उन्होंने सभी से एक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध जम्मू-कश्मीर के निर्माण का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।
2026 में पुलिस स्मृति दिवस समारोह कहाँ आयोजित हुए?
मुख्य परेड श्रीनगर के जीवान स्थित सशस्त्र पुलिस मुख्यालय में हुई, जहाँ डीजीपी नलिन प्रभात ने अध्यक्षता की। जम्मू में गांधी नगर के गुलशन ग्राउंड में आयोजित समारोह की अध्यक्षता आईजीपी तेजिंदर सिंह ने की।
1959 के हॉट स्प्रिंग्स हमले में क्या हुआ था?
21 अक्टूबर 1959 को भारतीय पुलिस की एक गश्ती टीम पर लद्दाख के अक्साई चिन क्षेत्र के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए, जबकि कई अन्य घायल हुए या बंदी बना लिए गए।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक कहाँ है और इसमें क्या है?
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित है। इसमें 30 फुट ऊँची ग्रेनाइट की केंद्रीय प्रतिमा और 'वॉल ऑफ वेलर' है, जिस पर स्वतंत्रता के बाद से देश की सेवा में शहीद हुए हजारों पुलिसकर्मियों के नाम अंकित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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