क्या जेएनयू को राष्ट्रविरोधी साजिशों का अड्डा बनने से रोका जाएगा? : आर्यन मान
सारांश
Key Takeaways
- जेएनयू को राष्ट्रविरोधी साजिशों का अड्डा नहीं बनने देना चाहिए।
- संविधान-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- छात्र राजनीति को जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक होना चाहिए।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष आर्यन मान ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाल के घटनाक्रमों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेएनयू को किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी साजिश का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। न ही विश्वविद्यालय परिसरों को संविधान-विरोधी गतिविधियों का केंद्र बनने की अनुमति दी जाएगी।
मान ने मंगलवार को अपने एक बयान में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ जेएनयू समेत देशभर के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों से आग्रह करता है कि वे संविधान के साथ खड़े रहें, न कि इसके खिलाफ। उन्होंने आरोप लगाया कि जेएनयू में कुछ वामपंथी समूह लगातार शैक्षणिक माहौल का दुरुपयोग कर रहे हैं और असहमति के नाम पर अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
उनके अनुसार, उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद इन समूहों को न्यायपालिका के अधिकार का सम्मान करना चाहिए था। लेकिन इसके विपरीत, कुछ छात्रों ने उकसावेपूर्ण और उत्तेजक नारेबाजी कर विश्वविद्यालय परिसर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि यह किसी भी तरह से ‘असहमति’ नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देने की एक सोची-समझी कोशिश है। डूसू अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य शिक्षा, संवाद और राष्ट्रनिर्माण है। इन्हें किसी भी स्थिति में अलगाववादी विचारों या भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाने वाले मंचों में बदलने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि 2016 से जेएनयू में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि एक व्यवस्थित तंत्र विश्वविद्यालयों को भटकाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने और राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
डूसू अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई हिंसा भड़काए, नफरत फैलाए, या संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करे। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में राष्ट्र, न्यायपालिका, और संविधान पर हमले सामान्य नहीं माने जा सकते।
उन्होंने मांग की कि उन सभी व्यक्तियों पर तुरंत और कठोर कार्रवाई की जाए जो विश्वविद्यालय परिसरों में अशांति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। डूसू अध्यक्ष ने कहा कि छात्र राजनीति जिम्मेदारी, उत्तरदायित्व और अनुशासन का प्रतीक होनी चाहिए। कैंपसों को अराजकता के हवाले नहीं किया जा सकता। जो लोग संविधान से ऊपर अराजकता को चुनते हैं, उन्हें रोकना और जवाबदेह बनाना ही होगा।