क्या कड़ी मेहनत के बाद भी वजन कम नहीं हो रहा? बेहतर नींद से बनेगी बात
सारांश
Key Takeaways
- नींद वजन कम करने का एक महत्वपूर्ण कारक है।
- सात से आठ घंटे की गहरी नींद लेना आवश्यक है।
- भूख बढ़ाने वाले हार्मोन को नियंत्रित करना आवश्यक है।
- नींद की कमी से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
- खानपान के साथ-साथ नींद पर भी ध्यान दें।
नई दिल्ली, 10 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। क्या आप जिम में कड़ी मेहनत करने और सख्त डाइट का पालन करने के बावजूद भी वजन कम नहीं कर पा रहे हैं? तो इसका समाधान आपकी नींद में छिपा हो सकता है।
प्रसिद्ध न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा का कहना है कि वजन कम करने के लिए सबसे बड़ा परिवर्तन आपकी नींद से ही संभव है।
विभिन्न शोधों से यह स्पष्ट होता है कि जल्दी सोने और पूरी नींद लेने से इंसुलिन की संवेदनशीलता में वृद्धि होती है, भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन में कमी आती है और शरीर में फैट बर्न की प्रक्रिया तेज होती है।
अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस के अनुसार, आज के समय में लोग बेहतर नींद से वंचित हैं। पहले लोग औसतन नौ घंटे सोते थे, जबकि अब हम केवल साढ़े छह घंटे की नींद ले पाते हैं। लगभग तीस प्रतिशत वयस्क रात में छह घंटे से कम सोते हैं।
चौबीस घंटे चलने वाली अर्थव्यवस्था, निरंतर काम, मोबाइल की रोशनी और टीवी ने हमारी नींद के प्राकृतिक चक्र को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है। भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन का स्तर बढ़ता है, जबकि भूख मिटाने वाला हार्मोन लेप्टिन घटता है। इसका परिणाम यह है कि लोग अधिक खाते हैं, खासकर मीठा और जंक फूड। इससे इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, ब्लड शुगर बढ़ता है और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
मोटापा भी तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और कैलोरी बर्न नहीं होती। हालांकि, खराब खानपान और कम व्यायाम भी जिम्मेदार हैं, लेकिन नींद की कमी इन बीमारियों को और गंभीर बना देती है।
पूजा मखीजा के अनुसार, सात से आठ घंटे की गहरी नींद शरीर को रीसेट करती है, भूख को नियंत्रित करती है और मोटापा एवं मधुमेह से रक्षा करती है। चौंकाने वाली बात यह है कि केवल पांच से दस प्रतिशत लोग ही लंबे समय तक डाइट और व्यायाम से वजन को नियंत्रित रख पाते हैं। बाकी के लिए नींद ही असली कुंजी है।