क्या मां सरस्वती को विशेष भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है?
सारांश
Key Takeaways
- बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती के सम्मान में मनाया जाता है।
- इस दिन विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं, जैसे कॉपी और पैन।
- विभिन्न मंदिरों में अनुष्ठान और समारोह का आयोजन होता है।
नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूरे देश में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और मां सरस्वती को खास किस्म के भोग अर्पित किए जाते हैं।
बसंत का आगमन होते ही मां को ज्ञान की वस्तुओं के साथ-साथ, पीला भोग और पीले वस्त्र भी अत्यधिक प्रिय होते हैं। आइए, हम उत्तर से दक्षिण तक के कुछ प्रमुख मंदिरों में अर्पित किए जाने वाले विशेष भोग के बारे में जानते हैं।
राजस्थान के बसंतगढ़ में स्थित सरस्वती उद्गम मंदिर में बसंत पंचमी के दिन लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां मां को भोग स्वरूप मिष्ठान के साथ-साथ कॉपी और पैन भी चढ़ाए जाते हैं। भक्त विशेष रूप से मां को कॉपी और पैन अर्पित करते हैं।
आंध्र प्रदेश के वारंगल स्थित सरस्वती मंदिर में बसंत पंचमी के दिन बच्चों और विद्यार्थियों के लिए विशेष अक्षराभ्यास का आयोजन किया जाता है और मां को केसरिया मीठे चावल, मीठे पूए और पीले मिष्ठान का भोग अर्पित किया जाता है। बच्चे और विद्यार्थी मां का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर आते हैं।
ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर में बसंत पंचमी का पर्व अनोखे तरीके से मनाया जाता है। यहां मां सरस्वती और प्रभु जगन्नाथ को 'बसंत काकेरा' का भोग अर्पित किया जाता है। यह प्रसाद प्रभु जगन्नाथ के अलावा, 'दक्षिण घर' में चढ़ाया जाता है, जहां मां लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। बसंत काकेरा गेहूं और चावल के आटे से बना मीठा भोग होता है।
मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित शारदा देवी मंदिर में बसंत पंचमी का उत्सव खास होता है। इस दिन मां को हलवा-पूरी और केसरिया खीर का भोग अर्पित किया जाता है और उन्हें पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं। भक्त बड़ी संख्या में पीले फूल और पीले मिष्ठान लेकर मंदिर पहुंचते हैं।
तेलंगाना के बसरा स्थित ज्ञान सरस्वती मंदिर में भी बसंत पंचमी के दिन अनुष्ठान और 'अक्षराभ्यासम' का आयोजन किया जाता है, जहां भोग के रूप में पीले मीठे चावल और पीली बुंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं।