क्या पद्मश्री सम्मान कैलाश चंद्र पंत के साहित्यिक और सामाजिक जीवन की यात्रा का सम्मान है?
सारांश
Key Takeaways
- कैलाश चंद्र पंत का पद्मश्री सम्मान उनके संघर्ष का प्रतीक है।
- हिंदी भवन का विकास उनके सहयोगियों की मदद से हुआ।
- साहित्य के प्रति उनका समर्पण गहरा है।
- उन्होंने हिंदुत्व के विचारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- उनका मानना है कि ईमानदारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
भोपाल, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की तीन प्रमुख व्यक्तियों को इस वर्ष पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है, जिनमें कैलाश चंद्र पंत का नाम भी शामिल है, जिन्होंने साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद, साहित्यिक समुदाय और प्रदेशभर में खुशी का माहौल है। इस उपलब्धि पर कैलाश चंद्र पंत ने भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों के लिए भी गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से संवाद करते हुए अपने जीवन के अनुभव साझा किए और बताया कि उन्होंने एक शिक्षित, संस्कारवान और सांस्कृतिक वातावरण में पला-बढ़ा है, जिसे वे अपने लिए सौभाग्य मानते हैं। कैलाश चंद्र पंत ने स्नातक स्तर पर राजनीति शास्त्र का चयन किया था और उनके प्रोफेसर, जो एक ईसाई थे, ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
पंत कहते हैं कि जब उनके प्रोफेसर शंकराचार्य के दर्शन की चर्चा करते थे, तो वे अक्सर कहते थे कि दुनिया के बड़े दार्शनिक भी शंकराचार्य की बौद्धिकता के चरणों की धूल के बराबर नहीं हैं। इस मार्गदर्शन ने उनकी राजनीतिक और वैचारिक समझ को समृद्ध किया।
उन्होंने बताया कि उनके जीवन में संघर्ष के कई दौर आए। उन्होंने परिस्थितियों का सामना करते हुए खुद को स्थापित किया। एक उत्कृष्ट अखबार निकालने की इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने एक प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की। हालांकि, दैनिक अखबार का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन साप्ताहिक अखबार की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लगभग २० वर्षों बाद जब उन्हें हिंदी भवन का दायित्व सौंपा गया, तो उन्हें अखबार बंद करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा, क्योंकि उस समय उनके सामने हिंदी भवन और अखबार में से किसी एक को चुनने का सवाल था।
कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि मित्रों के सहयोग से उन्होंने हिंदी भवन को एक विस्तृत और संगठित स्वरूप प्रदान किया। आज, हिंदी भवन साहित्य का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहाँ १३ कमरे सामान्य सुविधाओं के साथ उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि साहित्य और भाषा के लिए इस तरह के कार्य करने से उन्हें गहरा मानसिक संतोष मिलता है और उनके जीवन में आत्मसंतोष की अनुभूति हमेशा बनी रहती है।
पंत ने बताया कि वे विचारधारात्मक रूप से हिंदुत्व से जुड़े रहे हैं और उन्होंने हिंदू एकता मंच की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसे तत्व सामने आते हैं, जो दूसरों की प्रगति देखकर ईर्ष्या करने लगते हैं, लेकिन धार्मिक प्रवृत्ति के कारण उन्होंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया कि कौन उनसे आगे बढ़ गया है। उनका मानना है कि अपने कार्यों और विचारों के प्रति ईमानदार रहना सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पद्मश्री को लेकर कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि यह पुरस्कार उनके साहित्यिक और सामाजिक जीवन की यात्रा का सम्मान है, जो उन्हें भाषा, संस्कृति और समाज के लिए आगे भी काम करने की प्रेरणा देता रहेगा।