कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह के बयान पर क्या कहा?

सारांश
Key Takeaways
- कमलनाथ ने पुरानी बातें उखाड़ने को निरर्थक बताया।
- दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच की लड़ाई से कांग्रेस की सरकार गिरी।
- साल 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी।
- शिवराज सिंह चौहान ने सरकार गिरने के बाद मुख्यमंत्री का पद संभाला।
- कमलनाथ ने सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं का खंडन किया।
भोपाल, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई लाभ नहीं होता।
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में साल २०२० में मेरी अध्यक्षता में कांग्रेस सरकार के गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयान दिए गए हैं। मेरा कहना है कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई लाभ नहीं।
उन्होंने कहा कि वास्तव में, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा, ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह आभास था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिरा दी।
जिन्हें जानकारी नहीं है, बता दें कि साल २०१८ में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी और कमान कमलनाथ को मिली थी, लेकिन १५ महीने बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत की और अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा ज्वाइन कर ली। सिंधिया के जाने से कमलनाथ की सरकार गिर गई और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बन गए।
उस समय सियासी गलियारों में चर्चा थी कि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच की लड़ाई के कारण कांग्रेस की सरकार गिर गई। दिग्विजय सिंह ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह सच नहीं है।
उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही चेतावनी दी थी कि ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने एक बड़े उद्योगपति के घर पर हुई डिनर पार्टी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पार्टी में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों शामिल थे। मैंने स्वयं उनसे कहा था कि संभलना, कहीं दोनो की लड़ाई में सरकार न गिर जाए। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने अपने घर पर डिनर का आयोजन किया, जिसमें मैं, कमलनाथ और सिंधिया थे। इस बैठक में सभी समस्याओं की एक सूची बनी, जिस पर मैंने भी हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि उनके प्रयासों के बावजूद कांग्रेस की सरकार नहीं बच पाई। उनका ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके पिता माधवराव सिंधिया से कोई विवाद नहीं था।