डॉ. काजमी ने पाकिस्तान को बताया अमेरिका का 'गुलाम', सीजफायर वार्ता की प्रशंसा की
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. रेहान काजमी ने अमेरिका को पराजित और पाकिस्तान को 'गुलाम देश' बताया।
- सीजफायर अमेरिका की मजबूरी है।
- ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को स्वीकार कराना संभव किया।
- पाकिस्तान अमेरिका के इशारों पर काम कर रहा है।
- मिडल ईस्ट में सीजफायर वार्ता चल रही है।
बाराबंकी, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मिडल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और हालिया सीजफायर के बीच बाराबंकी के किंतूर गांव से एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आवाज सुनाई दी है।
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई (दिवंगत) के वंशज डॉ. रेहान काजमी ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में अमेरिका को पराजित देश और पाकिस्तान को 'आतंक का केंद्र' बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीजफायर अमेरिका की मजबूरी है, क्योंकि वह अपने किसी भी उद्देश्य में सफल नहीं हो सका।
डॉ. काजमी ने स्पष्ट किया कि किसी की जीत इस बात पर निर्भर करती है कि उसने अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया या नहीं। अमेरिका की कोशिश थी कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो और वहां के संसाधनों पर उसका नियंत्रण हो, लेकिन उसे निराशा का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों पर अमेरिका को झुका दिया है। गाजा, फिलिस्तीन और लेबनान के संदर्भ में ईरान की शर्तों को वाशिंगटन ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि अब पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिका बुरी तरह से हार गया है और ईरान एक असली सुपर पावर के रूप में उभरा है।
पाकिस्तान की भूमिका पर तीखा प्रहार करते हुए, डॉ. रेहान काजमी ने इसे अमेरिका का 'गुलाम देश' करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि अमेरिका के इशारे पर काम कर रहा है, क्योंकि यदि अमेरिका सीधे ईरान से बातचीत के लिए जाता, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बेइज्जती होती।
डॉ. काजमी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान अमेरिका से पैसे लेकर अपने यहां आतंकवाद को बढ़ावा देता है और वह अमेरिका के इशारे पर ही कार्य करता है। इसके साथ ही, पाकिस्तान अशांति फैलाने का काम कर रहा है।
डॉ. रेहान काजमी ने कहा कि पाकिस्तान इस विवाद में जबरदस्ती शामिल होकर भारत को यह बताना चाहता है कि वह 'विश्व गुरु' है, लेकिन उसकी वास्तविकता दुनिया से छिपी नहीं है। पाकिस्तान की कोई स्वतंत्र नीति नहीं है और वह केवल अमेरिका के हितों की पूर्ति कर रहा है।
ज्ञात हो कि मिडल ईस्ट में युद्ध को लेकर इस्लामाबाद में सीजफायर वार्ता चल रही है। इस वार्ता में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल होने के लिए आए हैं। वर्तमान में पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है, क्योंकि मिडल ईस्ट युद्ध का वैश्विक प्रभाव पड़ा है।