केरल हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा
सारांश
Key Takeaways
- केरल हाई कोर्ट ने चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
- याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई कर्मियों को पोस्टल बैलेट नहीं मिला।
- निर्देश दिया गया कि प्रभावित कर्मियों को तुरंत बैलेट उपलब्ध कराया जाए।
- इस प्रक्रिया को 8 अप्रैल तक पूरा करने का आदेश दिया गया।
कोच्चि, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल हाई कोर्ट ने मतदान के एक दिन पहले महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसे केरल एनजीओ यूनियन ने दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, जो चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं, उन्हें पोस्टल बैलेट नहीं मिलने के कारण मतदान के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है।
याचिका में कहा गया कि चुनाव संचालन नियम, 1961 के तहत चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मियों को पोस्टल बैलेट के जरिए वोट डालने का अधिकार है। इसके बावजूद, निर्धारित समय सीमा में फॉर्म-12 जमा करने के बावजूद कई कर्मचारियों को बैलेट पेपर नहीं मिल पाए।
पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान की निर्धारित अवधि 1 अप्रैल से 8 अप्रैल तक थी, लेकिन वितरण में देरी के चलते यह व्यवस्था बहुत हद तक निष्प्रभावी साबित हुई। यूनियन के अनुसार, 6 अप्रैल तक भी कई वोटर सुविधा केंद्रों पर बैलेट पेपर नहीं पहुंचे थे, जिससे कर्मचारियों को बिना वोट डाले लौटना पड़ा।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, 8 अप्रैल को चुनाव कर्मियों को ईवीएम और अन्य चुनाव सामग्री लेकर अपने-अपने मतदान केंद्रों के लिए रवाना होना था, जिससे उनके पास वोट डालने का समय नहीं बच रहा था।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि चुनाव ड्यूटी की लगातार और अनिवार्य प्रकृति के कारण कई कर्मचारी व्यावहारिक रूप से अपने मतदान अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, जो कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन पात्र कर्मियों को अब तक पोस्टल बैलेट नहीं मिला है, उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए प्रभावित कर्मियों की सूची नोडल अधिकारियों को सौंपने का आदेश दिया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए और हर हाल में 8 अप्रैल दोपहर 2 बजे तक यह सुनिश्चित किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने वाले कर्मचारी खुद अपने मताधिकार से वंचित न रहें।