क्या खजौली सीट का भविष्य जेडीयू के साथ तय होता है?

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क्या खजौली सीट का भविष्य जेडीयू के साथ तय होता है?

सारांश

बिहार के खजौली विधानसभा सीट पर चुनावी इतिहास में जेडीयू का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां के जातिगत समीकरण और राजनीतिक गठबंधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जानें कैसे यह सीट चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है।

Key Takeaways

  • खजौली विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास महत्वपूर्ण है।
  • जातिगत समीकरण चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
  • भाजपा और कांग्रेस ने यहाँ पर महत्वपूर्ण जीतें हासिल की हैं।
  • जेडीयू के साथ गठबंधन का महत्व है।
  • खजौली की कृषि मानसून पर निर्भर है।

पटना, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मधुबनी जिले की खजौली विधानसभा सीट पर अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा छह बार जीत हासिल की है, जबकि भाजपा ने चार बार अपनी जीत का परचम लहराया है। इस सीट की विशेषता यह है कि चुनाव वही पार्टी जीतती है, जिसे जनता दल (यूनाइटेड) का समर्थन प्राप्त होता है।

हालांकि, जेडीयू ने खजौली सीट पर कभी चुनाव नहीं जीता, लेकिन इसका प्रभाव हर चुनाव में स्पष्ट होता है। इस बार एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। यदि राजद को यहां जीत हासिल करनी है तो जातिगत समीकरण पर एक विशेष रणनीति बनानी होगी।

खजौली विधानसभा सीट झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। विधानसभा बनने के बाद कई बार खजौली के आरक्षण का दर्जा बदला गया। यह सीट 1952 से 1972 तक सामान्य रही और फिर 1977 से 2005 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही। 2010 के परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य श्रेणी में आ गई।

खजौली विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा कई अन्य पार्टियां भी चुनाव जीत चुकी हैं। 1967 और 1969 में यहां प्रजा समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने भी दो-दो बार जीत हासिल की, जबकि 1977 में यह सीट जनता पार्टी के खाते में गई थी।

2005 में भाजपा ने दो बार और 2010 में एक बार चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाई। 2015 में जेडीयू के राजद के साथ जाने के कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2020 में जेडीयू के एनडीए को समर्थन देने के बाद भाजपा ने फिर से खजौली सीट पर वापसी की। इस सीट पर अरुण शंकर प्रसाद ने राजद के सीताराम यादव को 22,689 वोटों से हराया।

जेडीयू के साथ गठबंधन में भाजपा को चार बार सफलता मिली और जब जेडीयू ने राजद का समर्थन किया तो लालू की पार्टी ने इस सीट पर चुनाव जीता। विधानसभा के अलावा लोकसभा चुनाव में भी इस सीट पर जेडीयू का मजबूत आधार बना हुआ है।

खजौली की कुल जनसंख्या 529577 है, जिसमें 274769 पुरुष और 254808 महिलाएं शामिल हैं। यदि मतदाताओं की बात करें तो खजौली में कुल वोटर 314426 हैं, जिनमें 164535 पुरुष, 149887 महिलाएं और 4 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।

मिथिला क्षेत्र में स्थित खजौली उपजाऊ मैदानी इलाकों के लिए प्रसिद्ध है। खजौली में कमला बलान और बछराज नदी बहती हैं, जिससे हर साल बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। यहां की प्रमुख फसलें गेहूं और दाल हैं। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण यहां की कृषि ज्यादातर मानसून पर निर्भर है।

Point of View

राजनीतिक गठबंधन और स्थानीय मुद्दे चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं। यह क्षेत्र न केवल स्थानीय राजनीति में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

खजौली विधानसभा सीट पर अब तक कितने चुनाव हुए हैं?
खजौली विधानसभा सीट पर अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं।
कौन सी पार्टी ने खजौली सीट पर सबसे ज्यादा जीत हासिल की है?
खजौली सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा छह बार जीत हासिल की है।
खजौली सीट का आरक्षण कब बदला गया?
खजौली सीट का आरक्षण कई बार बदला गया, जिसमें यह सीट 1952 से 1972 तक सामान्य और 1977 से 2005 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही।
2020 में खजौली सीट पर किसने जीत हासिल की?
2020 में भाजपा ने खजौली सीट पर जीत हासिल की, जहाँ अरुण शंकर प्रसाद ने राजद के सीताराम यादव को हराया।
खजौली क्षेत्र में प्रमुख फसलें कौन सी हैं?
खजौली क्षेत्र में प्रमुख फसलें गेहूं और दाल हैं।